सवाल उठता है कि क्या सिद्धू को यह सब पता ही नहीं है, या फिर 'इस्तीफ़ा' एक 'स्टंट' है। अगर उन्हें यह पता ही नहीं था कि उनका इस्तीफा लेने का अधिकार राहुल गाँधी को नहीं, अमरिंदर सिंह को है तो यह मंत्री के तौर पर उनकी काबिलियत पर प्रश्नचिह्न है।
"सिद्धू का विभाग बदले जाने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का मेरा कोई इरादा नहीं है। ऐसे में अब सिद्धू के लिए दो ही रास्ते बचे हैं- या तो वो नए विभाग का कार्यभार संभाल लें या फिर मंत्री पद छोड़ दें।"
जब स्मृति ईरानी ने दूसरी बार अमेठी के राजनीतिक अखाड़े में राहुल गाँधी को चुनौती दी थी तो कॉन्ग्रेस नेता और पंजाब सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने उनकी खिल्ली उड़ाते हुए कहा था कि अगर वह (स्मृति) राहुल गाँधी को हरा ले गईं तो सिद्धू राजनीति छोड़ देंगे।
नवजोत सिंह सिद्धू को जिस तरह से कैप्टेन ने किनारे पर खड़ा कर दिया है, वह काफी कुछ भाजपा में शत्रुघन सिन्हा को केंद्रीय नेतृत्व के खिलाफ लगातार बयानबाजी के बाद लगातार हाशिए पर किए जाने से मिलता है।