शर्त जो कोर्ट ने चिदंबरम के बेल के लिए रखी थी, वो है - (i) इस संबंध (केस) में प्रेस को ब्रीफ नहीं करेंगे। (ii) मामले से जुड़े गवाहों से संपर्क करने की कोशिश नहीं करेंगे। (iii) कोर्ट की इजाजत के बगैर विदेश नहीं जा सकते (iv) 2 लाख रुपए का निजी मुचलका भरना होगा।
अदालत ने कहा है कि बाहर निकलने के बाद चिदंबरम गवाहों से संपर्क करने की कोशिश नहीं करेंगे। कोर्ट की इजाजत के बगैर विदेश नहीं जाएँगे। इस मामले को लेकर मीडिया से बात करने पर भी पाबंदी लगाई गई है।
“ऐसा नहीं है कि पी चिदंबरम निर्दोष हैं, जिन्हें अंधेरे में रखा गया। यह मामला केवल INX मीडिया का ही नहीं है, बल्कि इसमें अन्य कंपनियाँ भी शामिल हैं। लॉन्ड्रिंग व शेयर होल्डिंग पैटर्न में 16 कंपनियाँ शामिल थीं। 16 देशों में 12 विदेशी बैंक खाता और 12 विदेशी संपत्तियों की पहचान की गई है।"
तुषार मेहता के अनुसार INX मीडिया के अलावा भी कई कम्पनियाँ संदिग्ध हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि ईडी ने 16 कम्पनियाँ चिह्नित की हैं, जिनके मनी लॉन्ड्रिंग और संदेहास्पद आर्थिक गतिविधियों में शामिल होने की शंका है।
लगभग 98 दिन हिरासत में बिताने के बाद अब पूर्व वित्त मंत्री परेशान हो चुके हैं। जिसके कारण उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में जजों के सामने अपनी याचिका फिर खारिज होने पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की 3 जजों की पीठ से कहा, "हाई कोर्ट ने सबूतों से छेड़छाड़ और मेरे भाग निकलने के डर से मेरी जमानत याचिक खारिज कर दी है।"
चिदंबरम को 21 अगस्त को सीबीआई ने गिरफ़्तार किया था। उनके बेटे कार्ति चिदंबरम ने कहा है कि राहुल और प्रियंका का उनके पिता से मुलाक़ात करने का मतलब है कि पूरी कॉन्ग्रेस पार्टी उनके साथ मजबूती से खड़ी है।
15 नवंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने चिदंबरम को जमानत देने से इनकार कर दिया था। साथ ही कहा था कि उनके ऊपर लगे आरोप पहली नजर में गंभीर प्रकृति के हैं और अपराध में उनकी भूमिका भी सक्रिय व प्रमुख रही है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि पी चिदंबरम के खिलाफ आरोप बेहद गंभीर हैं और इसमें आरोपित की भूमिका काफी सक्रिय रही है। अगर इस परिस्थिति में चिदंबरम को जमानत दी जाती है, तो यह जनहित के खिलाफ होगा।
हाई कोर्ट में पेश मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में कहा गया है कि चिदंबरम को प्राइवेट वार्ड में एडमिट करने की आवश्यकता नहीं है। जेल में ही उनके रेगुलर चेकअप और घर का खाना मुहैया कराने के निर्देश अदालत ने दिए हैं।
सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में एक रिव्यु पेटिशन डाली है। इसमें चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया केस में जमानत देने वाले दिल्ली हाई कोर्ट की तीन जजों की बेंच के आदेश को चुनौती दी गई है।