तमिलनाडु के तिरुप्पुर में भी नरेंद्र मोदी ने कॉन्ग्रेस पार्टी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने मध्यम वर्ग को हमेशा नकारा है इसलिए जनता ने उन्हें नकार दिया है।
मोदी ने कहा, "केंद्र ने आंध्र के लिए पिछले 55 महीने में कोई कमी नहीं छोड़ी। लेकिन कमी सिर्फ़ इतनी रही कि केंद्र से जो पैसा आया वो यहाँ कि सरकार ने आपको बताया नहीं। यहाँ खर्च़ नहीं किया।"
सस्ती लोकप्रियता के लिए PM मोदी की आड़ में एक ट्रोल ने अपने ट्वीट में पूर्वोत्तर की इस जनजाति के पहनावे और लोगों की तुलना 'मोर' से कर डाली, जिसे मीडिया गिरोहों द्वारा हाथों-हाथ रीट्वीट किया गया।
साढ़े तीन साल तक कुशलतापूर्वक सेवा देने के बावजूद उन्हें पद छोड़ना पड़ा था, इसकी वजह राहुल का वो आदेश था जिसके मुताबिक़ जो 80 साल के हो गए हों उन्हें सत्ता में नही रहना चाहिए।
पीएम ने कहा कि चाहे वो पाकिस्तान से आए हों, अफगानिस्तान से या फिर बांग्लादेश से... जो अल्पसंख्यक हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध पारसी और ईसाई हैं, उनको संरक्षण देना हमारा दायित्व है।
प्रियंका गाँधी की सीट का आवंटन इस ओर भी इशारा करता है कि कहीं न कहीं कॉन्ग्रेस को यह एहसास है कि वो वंशवादी परंपरा को आज भी जीवित रखे हुए है, जिसे दुनिया की नज़र से धूमिल करना होगा।
अपने काम करने के तरीकों से बहुमत की इस सरकार का पूरा फायदा उठाते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन 5 सालों में एक प्रबल राजनीतिक इच्छाशक्ति का उदाहरण पेश किया है।