अख़बार ने 1955-99 का भी दौर याद दिलाया, जब शिवसेना महाराष्ट्र के राजग गठबंधन में 'बड़ा भाई' की भूमिका में थी और बालासाहब ठाकरे ने मातोश्री से रिमोट कण्ट्रोल सरकार चलाई थी। अगर उस समय भाजपा सीएम पद माँगती तो क्या शिवसेना दे देती?
संजय राउत ने दावा किया था कि महाराष्ट्र के हित में कॉन्ग्रेस और एनसीपी का समर्थन शिवसेना को मिल सकता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि सोनिया और पवार की मुलाकात में क्या खिचड़ी पकती है।
संजय राउत के मुताबिक 'महाराष्ट्र के हित में' शिवसेना के साथ कॉन्ग्रेस और एनसीपी आ सकते हैं। बकौल राउत शिवसेना को समर्थन का आँकड़ा 175 तक पहुँच सकता है। 288 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आँकड़ा 145 है।
मुंबई में विधान भवन के कैंपस में शपथ ग्रहण की तैयारियाँ चल रही हैं। शपथ ग्रहण के लिए स्टेज बनाया जा रहा है। शामियाना लगाया जा रहा है, कुर्सियाँ लगाई जा रही है। बाक़ी तैयारियाँ भी ज़ोरों पर है।
पवार ने एक बार फिर शिवसेना को झटका देते हुए कहा है कि वो विपक्ष में बैठेंगे। नासिक में एनसीपी के संस्थापक-अध्यक्ष ने कहा कि चूँकि उन्हें विपक्ष में बैठने का जनादेश प्राप्त हुआ है, इसीलिए उनकी पार्टी सरकार गठन की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनेगी।
“सब जानते हैं कि विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने हमारे कई विधायक और नेताओं को अपने खेमे में शामिल कर लिया था। अगर वे सरकार बनाने में सक्षम होते हैं, तो वे फिर से और अधिक सख्ती के साथ ऐसा करेंगे। ऐसे में अगर हम शिवसेना के साथ सरकार बनाने में सक्षम....."
शिवसेना को समर्थन पर कॉन्ग्रेस का विभाजन साफ-साफ नजर आ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण और पृथ्वीराज चव्हाण इसके पक्ष में बताए जाते हैं। वहीं, सुशील शिंदे और संजय निरुपम जैसे नेता इसका विरोध कर रहे हैं।
शिवसेना के नहीं मानने की सूरत में निर्दलीय और अन्य छोटे दलों के साथ भाजपा अल्पमत सरकार का गठन कर सकती है। वहीं, एनसीपी ने फिर से साफ कर दिया है कि वह विपक्ष में ही बैठेगी।
“बीजेपी-शिवसेना गठबंधन के पास स्पष्ट बहुमत है। इसके अलावा निर्दलीयों का समर्थन भी है, गठबंधन ने 288 में से 161 सीटें जीतकर जनादेश हासिल किया है। हम इस जनादेश का सम्मान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमें नहीं लगता कि एक स्थिर सरकार बनाने में कोई बाधा है।”