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फेक न्यूज़ में द वायर ने घुसाया जातिगत एंगल वहीं आरोपितों के मुस्लिम होने पर छिपाया उनका मज़हब और नाम: जानें क्या है मामला

प्रोपेगैंडा वेबसाइट द वायर ने हिंदू विरोधी खबर को अंजाम देने की जल्दबाजी में न केवल झूठी खबर को फैलाया, बल्कि अपराध को जातिगत एंगल देकर लोगों को भड़काने का भी काम किया।

वाकई मुसलमान भारत में अल्पसंख्यक हैं, अलग-थलग हैं?

शेखर गुप्ता अकेले नहीं हैं। राजदीप से लेकर रवीश कुमार तक एक हरी-भरी जमात है, जिसके लिए अल्पसंख्यक की बातों का मतलब मुस्लिमपरस्ती है।

’41 किसानों की मौत’: लौट आया ‘नोटबंदी से होने वाली मौत’ वाला नैरेटिव किसान आंदोलन में भी

क्या किसान आंदोलनों से आ रहीं किसानों की मौत की खबरें वास्तव में धरना-प्रदर्शन से जुड़ी हुई मौत हैं? नोटबंदी के दौरान भी '32 दिन में 100 मौत' का चलन देखने को मिला था।

‘द इकोनॉमिस्ट हमेशा भारत विरोधी रहा’: NDTV पत्रकार श्रीनिवासन के मोदी विरोधी एजेंडे को HDFC चेयरमैन ने किया पस्त

HDFC के चेयरमैन दीपक पारेख इससे पहले केंद्र सरकार के बदलावों की सराहना कर चुके हैं। उन्होंने कृषि में बदलावों और श्रम कानून में आए बदलावों में भी सरकार का समर्थन किया था।

आढ़ती को हटा दें तो बहुत सी समस्या खत्म हो जाएगी: रवीश ने पाँच साल पहले ये ज्ञान दिया था, अब पलटदास काहे बन...

यही रवीश कुमार साल 2015 में इन किसानों की हालात पर चिंता जताते हुए बता चुके थे कि मंडियों में किसान आढ़ती के चंगुल में फँसा हुआ है, जहाँ उन्हें गुलाम बनाया जा रहा है।

हत्या-दंगा-ठगी करने वाला हारून मियाँ के लिए TOI ने तांत्रिक लिख फैलाया भ्रम, बेटा आरिफ भी देता था अब्बा का साथ

दिल्ली पुलिस ने ठगी करने वाले जालसाज हारून मियाँ उर्फ शाहजी बंगाली को अरेस्ट किया है। हारून लोगों को अंधविश्वास में फँसाता और...

नींद से जागो आरफा खानम शेरवानी! भक्त तो बस हलाला-शिर्क पढ़ ही रहे हैं, कई मुस्लिम वही कर रहे हैं

हिंदू इस्लाम को बदनाम नहीं कर रहे हैं। इसकी मट्टी पलीद उसी कट्टरपंथ ने की है जिसकी कठपुतली बनकर आरफा 'ज्ञानवाचक' बनती हैं।

हम लिख रहे हैं ‘ॐ नमः शिवाय’, क्योंकि सेकुलर मीडिया नहीं लिखेगी: रजनीकांत के जमाई धनुष के ट्वीट से किया खेल

अल्पसंख्यकों के अपराधों को 'हिंदू एंगल' देने वाली लिबरल-सेकुलर मीडिया अब हिंदुओं की धार्मिक अभिव्यक्ति को छिपाने में भी लग गई है।

कुछ याद आ रहा है वो माह था दिसम्बर: जब मुस्लिम भीड़ें और वामपंथी देश को फूँकने के लिए साथ आए

वामपंथी पोर्टलों पर नैरेटिव बदलने की कोशिशें जारी हैं। वो यह सोच रहे हैं कि साल भर बाद हिन्दू समाज और रिसते घावों को चाटती दिल्ली भूल गए होंगे कि साल भर पहले उसके सीने पर छुरा मारने वाले, और कपड़ों पर आग लगाने वाले लोगों की पहचान क्या थी।

‘किसानो’ के शाहीन बाग में Zee न्यूज – R. भारत की महिला पत्रकारों पर हमले की कोशिश, ‘गोदी मीडिया’ चिल्लाते हुए पीछे पड़ी...

"मेरे कैमरापर्सन को क़ैदी की तरह पकड़कर साथ ले गए। हज़ारों की भीड़ मेरे पीछे दौड़ रही थी मेरा मोबाइल छीन लिया गया और बहुत कुछ हुआ।”

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