जब दर्शक बढ़ रहे हैं, उनका जन्म बिलकुल ही अलग समय में हुआ है, तब न्यूज वाले उनके दादा की जवानी के शो क्यों चला रहे हैं? याद कीजिए कि चौबीस घंटे का न्यूज टेलीविजन जब से आया है, आपने न्यूज डिबेट में क्या बदलाव देखे हैं? आपको याद नहीं आएगा।
नीतीश कुमार ने कहा, "तो भाई आखिर इसका क्या अर्थ होने वाला है। कहाँ ले जाना चाहते हैं समाज को, किस तरह की भाषा का प्रयोग करते हैं? आपको कोई भ्रम है क्या कि आपकी भाषा के प्रयोग करने से कुछ होता है? कुछ नहीं होता है...."
पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में मुस्लिम आलिम द्वारा काले जादू का उपयोग करके किए गए इलाज में 10 साल के बच्चे की मौत हो गई। मगर मीडिया गिरोह ने इस अपराध को हिन्दू तांत्रिक द्वारा किए गए अपराध के रूप में फैलाया।
The Hindu ने भारतीय सेना के बारे में बड़े ही स्पष्ट और सीधे शब्दों में लिखा है, मगर प्रदर्शनकारियों के बारे में लिखते हुए इसी अखबार के शब्द खत्म हो गए! या फिर यूँ कहें कि ये भी प्रोपेगेंडा फैलाने वाले गिरोह का हिस्सा बनकर अराजत तत्वों का तुष्टिकरण करना चाहते हैं।
"राहुल गाँधी अपनी रैलियों में प्यार की राजनीति की बात करते हैं, और उनके युवा नेता महिला पत्रकार की पिटाई की तैयारी कर रहे है। कॉन्ग्रेस पार्टी जैसी ढोंगी पार्टी पूरे ब्रह्मांड में नही मिलेगी।"
भारतीय राजनयिक हर्षवर्धन श्रृंगला ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह एक अराजकतावादी प्रावधान था, जिससे अर्थव्यवस्था का दम घुट रहा था और पाकिस्तानी आतंकवाद को बढ़ावा मिल रहा था।
एनडीटीवी के पत्रकार पल्लव बागला के इस तरह के अशिष्ट और असभ्य सवाल से मीडिया को ब्रीफ करने आए वैज्ञानिक काफी दुखी और असहज हो जाते हैं। वैज्ञानिकों पर चिल्लाकर पत्रकार महोदय ने साबित कर दिया कि पूरे मिशन की 95% सफलता उसके लिए मायने नहीं रखती।
पिछले पाँच सालों में रवीश की पूरी पत्रकारिता, सेलेक्टिव रही है। यह कह कर उन्माद फैलाने की कला सिर्फ रवीश को आती है कि जिसमें बार-बार एक समुदाय को कहा जाता है कि 'डर का माहौल है', हिन्दू तुम्हें लिंच कर रहे हैं, संभल कर रहो। भारत की स्थिति सोमालिया या नॉर्थ कोरिया से भी बदतर बताने में ये आदमी लायडिटेक्टर मशीन को भी धोखा दे देगा।
शेखी बखारने के चक्कर में पाकिस्तानी रेल मंत्री को अपनी बेइज्जती करवाने की आदत रही है। वे भारत-पाकिस्तान के बीच एक-दो महीने में परमाणु युद्ध होने की भविष्यवाणी कर चुके हैं। उनका दावा है कि पाक के पास पाव, आधा पाव के एटम बम हैं।
डीएम अनुराग पटेल कहते हैं कि प्रिंट के पत्रकार ने वीडियो बनाया, इसीलिए उस पर मुक़दमे दायर किए गए। डीएम साहब बताएँ कि रेडियो पत्रकार को देखने का हक़ है या उसे सिर्फ़ सुन कर ही काम चलाना है? प्रशासनिक लापरवाही को छिपाने के लिए ख़ुद का मज़ाक बना रहे डीएम।