राकेश सिन्हा ने जुलाई 2019 में जनसंख्या विनियमन विधेयक को एक निजी विधेयक के रूप में पेश किया था। वहीं वर्ष 2018 सितंबर माह में कॉन्ग्रेस के राजनेता जितिन प्रसाद ने भी जनसंख्या वृद्धि की जाँच के लिए एक कानून बनाने की माँग की थी।
"कॉन्ग्रेस के समय में दंगे हुए, इन्होंने दंगों को शांत करने का प्रयास किया होगा और हम भी दंगों को शांत करेंगे। परन्तु इसको मेरी पार्टी और विचारधारा पर मढ़ने का प्रयास निंदनीय है, जब हकीकत ये है कि कॉन्ग्रेस के शासन में 76% लोग दंगों में मारे गए हैं।"
"मैं सदन को और सदन के माध्यम से देश को विश्वास दिलाता हूँ कि दंगो के लिए जिम्मेदार लोग और दंगों का षड्यंत्र करने वाले लोग, चाहे वे किसी भी जाति, मजहब या पार्टी के हो, उन्हें किसी भी दशा में बख्शा नहीं जाएगा।"
लोकसभा चुनाव के वक्त सार्वजनिक तौर पर कहा गया था कि राज्यसभा चुनाव के वक्त राजद अपने कोटे की एक सीट कॉन्ग्रेस को देगी। लेकिन, अब उसने दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। ऐसा कॉन्ग्रेस के वादा याद दिलाने के बावजूद किया गया है।
ट्विटर पर साझा जानकारी में यह भी कहा गया है कि इन नामों को भारतीय जनता पार्टी की केन्द्रीय चुनाव समिति ने आगामी राज्य सभा चुनावों के लिए अपनी स्वीकृति प्रदान की है। दरअसल, भारतीय जनता पार्टी की केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक 10 मार्च को बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा की अध्यक्षता में आयोजित की गई थी।
पश्चिम बंगाल की 5 राज्यसभा सीटों के लिए 26 मार्च को चुनाव होने हैं। ऐसे में पश्चिम बंगाल में विधायकों के आँकड़े के लिहाज से 4 राज्यसभा सीटें टीएमसी के हिस्से में जाना तय हैं और बाकी एक सीट अन्य के खाते में जा सकती है।
“उरजुल हसन पर प्रधानमंत्री और कई अन्य केंद्रीय मंत्रियों के खिलाफ अपमानजनक और आपत्तिजनक पोस्ट करने का आरोप है। राजनैतिक तटस्थता बनाए रखने में नाकाम रहने पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।”
पिछले वर्ष दिसंबर में कोटा के जेके लोन अस्पताल में सौ बच्चों की मौत से खासा बवाल मचा था और इसके चलते राजस्थान सरकार की काफी फजीहत हुई थी। विपक्ष ही नहीं बल्कि खुद राज्य सरकार के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने इस मामले में जिम्मेदारी तय करने की बात कही थी।
यह बिल किसी तरह से मुस्लिम भाइयों को नुकसान नहीं करता है। इससे किसी की नागरिकता खतरे में नहीं पड़ने वाली है। यह शरणार्थियों को नागरिकता देगी, मगर भारत के मुस्लिमों को इससे डरने की जरूरत नहीं है। इनकी नागरिकता को कोई असर नहीं पड़ने वाला है।
कपिल सिब्बल ने कहा कि सबसे पहले टू नेशन थ्योरी वीर सावरकर ने दी थी। इसके बाद सिब्बल ने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए (प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के लिए असंसदीय शब्दों का प्रयोग भी) कहा कि...