सागरिका जैसे लोग मानते हैं कि वे सेना के बारे में उन लोगों से ज्यादा जानती हैं जिन्होंने वतन के लिए मरने-मिटने की कसम खाई है। जब सागरिका घोष के पास तर्क खत्म हो गए तो वह बदतमीज़ी पर उतर आईं।
अपने मनसूबों को विफल होता देख तस्करों ने सुरक्षाबलों पर घातक हमला भी किया। लेकिन फिर भी जवानों ने हार नहीं मानी और सीमा पार होने वाली अवैध तस्करी को नाकाम कर दिया।
एनआईए ने हसन अली और हरीश मोहम्मद को गिरफ्तार किया था। दोनों ने पूरे नेटवर्क का खुलासा करते हुए बताया था कि आतंकी हमले को अंजाम देने के लिए उन्होंने पैसे की व्यवस्था और अन्य तैयारियाँ की थी।
राज्य के कई गाँवों में 'विलेज डिफेंस कमिटी' गठित की गई है, जो भारतीय सुरक्षा बलों की देखरेख में काम करती है। लेकिन, पीडीपी ने सुरक्षा बलों को भी सांप्रदायिक रंग देना शुरू कर दिया है। पार्टी ने कहा कि सिर्फ़ स्थानीय हिन्दुओं को हथियारों से लैस किया जा रहा है।
डूरंड रेखा के पार पाक आतंकियों ने अफ़गान तालिबान और अफ़गान विद्रोही संगठन हक्कानी नेटवर्क के साथ हाथ मिला लिया। डूरंड रेखा अफ़गानिस्तान से पाकिस्तान को अलग करती है। यहाँ इनके चरमपंथी काडर को विध्वंसक गतिविधियों की ट्रेनिंग दी जाती है।
केंद्र सरकार ने इसी साल मई में 'जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश', 'जमात-उल-मुजाहिदीन भारत' और 'जमात-उल-मुजाहिदीन हिंदुस्तान' तथा इसके सभी स्वरूपों को आतंकवादी संगठन की लिस्ट में शामिल किया है। ये मदरसों के माध्यम से दहशतगर्दी फैलाने का काम करते हैं।
एक वरिष्ठ भारतीय सेना अधिकारी ने बताया कि भारतीय सेना ऑपरेशनल मुद्दों के कारण कमांडर्स को सेवानिवृत्त करने के लिए उत्सुक नहीं है। हमलों की जाँच की गई है। आवश्यक कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं। दिलचस्प बात यह है कि बेस के एक कमांडर ने हमले के दो दिन पहले ही कमान संभाली थी।
यह वीडियो राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति चिंतित किसी भी सच्चे नागरिक को परेशान कर सकता है। क्योंकि, कश्मीर में बेशक आतंकी गतिविधियाँ वर्षों से संरक्षण पाती आ रही हों लेकिन पाकिस्तान की तरह खुलेआम आतंक और जिहाद के नाम पर उकसाते और चंदा इकठ्ठा करते आतंकी आने वाले किसी बड़े खतरे की आहट हैं।
आँखों के सामने पति को खो देने के एहसास ने दिल और दिमाग पर जो गहरा असर छोड़ा होगा वो संध्या के लिए किसी सदमें से कम तो बिल्कुल नहीं होगा। वहीं दूसरी तरफ़ आशीष की माँ की निगाहें बेटे की घर वापसी की आस लगाए बैठी थीं, जो अब कुछ बोलने की स्थिति में नहीं। एक माँ का इस क़दर चुप हो जाना उनके अपार दु:ख को प्रकट करने के लिए काफ़ी है।