Saturday, September 25, 2021

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संसद सत्र

ओवैसी के लिए तीन तलाक़ और सबरीमाला की ‘परंपराएँ’ समान हैं… लेकिन ऐसा सच में है नहीं

इस दोनों प्रथाओं के बीच समानता स्थापित करने के कोई भी प्रयास अत्यंत घृणित है और मुस्लिम महिलाओं द्वारा तीन तलाक के परिणामस्वरूप झेले जा रहे दमन के चरम की गंभीरता को कमतर करता है।

मैं राहुल गाँधी हूँ, मोबाइल चलाना मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे चलाता रहूँगा

प्रमुख विपक्षी पार्टी का अध्यक्ष होने के नाते राष्ट्रपति की बातों को सुन कर चर्चा में सक्रियता से हिस्सा लेना कैसे संभव हो पाएगा, जब वह अभिभाषण में क्या कहा जा रहा है, यह सुने ही नहीं? राहुल गाँधी से सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल किया कि वह अपना दायित्व भूल कर फोन में क्यों लगे हुए हैं?

संसद में धार्मिक नारेबाजी बर्दाश्त नहीं, विपक्षी नेताओं को रोक-टोक वाली घटना अनुचित: LS अध्यक्ष

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शपथ ग्रहण के दौरान विपक्षी नेताओं को रोक-टोक किए जाने को अनुचित ठहराया। उन्होंने कहा, "हम संसद को नियमों के तहत चलाने की कोशिश करेंगे। 'जय श्री राम', 'जय भारत', 'वन्दे मातरम', यह सब पुराने मुद्दे हैं।"

शपथ लेने के बाद रजिस्टर पर हस्ताक्षर करना भूले राहुल गाँधी, राजनाथ ने दिलाया याद

पहले दिन सांसदों ने जम कर 'भारत माता की जय' के नारे लगाए और जब आसनसोल से चुने गए बाबुल सुप्रियों ने शपथ लिया, तब सदन में 'जय श्री राम' के नारे गूँजे। अभी तक विपक्षी पार्टी कॉन्ग्रेस ने सदन में अपने नेता के नाम की घोषणा नहीं की है।

BJP सांसद को नहीं मिली भोजपुरी में शपथ लेने की अनुमति, पूर्व केंद्रीय मंत्री ने जताई आपत्ति

नियमों का हवाला देते हुए भाजपा सांसद को भोजपुरी में शपथ लेने की अनुमति नहीं दी गई। पहले बार सांसद बने नकुल नाथ को संसद तक छोड़ने ख़ुद उनके पिता कमलनाथ पहुँचे। संसद सत्र के पहले दिन और क्या-क्या हुआ, जानिए यहाँ।

नई सरकार, नया कामकाज: जानिए कब से चलेगी संसद, और कब पेश होगा बजट

नवनिर्वाचित लोकसभा का पहला सत्र 17 जून से शुरू होकर 26 जुलाई तक चलेगा। इस बीच 5 जुलाई को प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली नई सरकार अपना बजट पेश करेगी। 40 दिन तक चलने वाले इस सत्र में 30 बैठकें होंगी।

प्रधानमंत्री को डिबेट के लिए चुनौती देने वाले राहुल गाँधी सदन में सरकार से एक भी सवाल नहीं पूछ पाए

राहुल ने सदन के अंदर महज 14 चर्चाओं में ही हिस्सा लिया है। उन्होंने सरकार से एक भी धारदार सवाल पूछने की हिम्मत नहीं की। यही नहीं, राहुल गाँधी ने सदन के अंदर एक भी प्राइवेट मेंबर बिल पेश नहीं किया।

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