CAA का समर्थन करने गए नीरज तो अब नहीं रहे... लेकिन छोड़ गए एक बेटी और एक बेटे को। दोनों ही छोटे हैं। कमाने वाले वो अकेले थे। अब सारा बोझ उनकी पत्नी पर! फिर भी परिजनों की माँग नहीं सुन रही है सोरेन सरकार। क्योंकि CM साहब मंत्रिमंडल विस्तार में व्यस्त हैं। किसी भी मंत्री ने पीड़ित परिजनों की सुध लेने की कोशिश नहीं की।
भले ही इस पत्थलगड़ी आंदोलन में हिंसा हुई हो, गैंगरेप तक किया गया हो। भले ही सांसद करिया मुंडा के सुरक्षाकर्मियों का पत्थलगड़ी समर्थकों ने अपहरण तक कर लिया हो। भले ही किसी पत्रकार की जान तक चली गई है! लेकिन शिबू सोरेन की राजनीति का फल खा रहे हेमंत भला अपने पिताजी की बातों से पीछे कैसे हटते! इसलिए उन्होंने मुख्यमंत्री बनने के 3 घंटों के भीतर ही...