खुफिया सूत्रों के मुताबिक इन लड़ाकों और कट्टरपंथियों को स्पष्ट तौर पर यह निर्देश दिया गया है कि भारतीय संपत्तियों और भारत सरकार के द्वारा सद्भावना नीति के तहत किए गए निर्माण कार्यों को निशाना बनाया जाए।
हत्यारा 6 साल पहले ही जर्मनी में आया था और 2018 से इस शरणार्थी कैम्प की सुविधा का लाभ उठा रहा था। ये घटना नॉर्थ राइन वेस्टफेलिया स्टेनफुर्ट जिले में स्थित ग्रेवेन में हुई।
हेरमैन ने बताया कि हमले के पीछे 'इस्लामी कट्टरपंथ’ से इंकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोपित को 'अल्लाह हू अकबर' चिल्लाते हुए सुना।
हिंदुत्व को गाली, भगवा ध्वज व स्वस्तिक का अपमान और 'फासिस्ट' शब्द का प्रयोग - आतंकियों की भाषा वही है, जिसका इस्तेमाल भारत का लेफ्ट और कुछ विपक्षी नेता पीएम मोदी को निशाना बनाने के लिए करते हैं।