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पत्रकारिता का समुदाय विशेष

‘जय श्री राम’ कत्ल का नारा! हिन्दूफ़ोबिया से ग्रसित सिर्फ BBC नहीं, Western Media की लम्बी फेहरिस्त

1. हिंदू अपराध करे तो पूरा हिंदुस्तान 'लिंचिस्तान', Pak के मजहब वालों का पाप ढकने के लिए उन्हें 'एशियन' बताना 2. खुले में शौच के लिए हिन्दू धर्म शास्त्र ज़िम्मेदार 3. हिंदुओं पर स्टोरी के लिए मानव-माँस खाते अघोरियों को दिखाना - हिन्दूफ़ोबिया से ग्रसित अंतरराष्ट्रीय मीडिया को समझने के लिए ये तो बस कुछ उदाहरण हैं। इनके कारनामों की लिस्ट बहुत लंबी है।

शेखर गुप्ता के The Print का रिपोर्टिंग के नाम पर फर्जीवाड़ा, लेखक ने अपने शब्दों के साथ खिलवाड़ पर लताड़ा

लेखक ने अपने भाषण में अरबी-फारसी शब्दों के इस्तेमाल से बचने और उनकी जगह हिन्दी का इस्तेमाल करने की सलाह दी थी। लेकिन, कृतिका शर्मा ने कई जगहों पर अपनी सहूलियत से फ़ारसी को 'उर्दू' कर दिया। नित्यानंद मिश्र का यह भी कहना है कि उन्होंने केवल "शासन/प्रभुत्व" बनाम "सरकार" शब्दों की बात की थी, लेकिन कृतिका ने रिपोर्ट को सनसनीखेज़ बनाने के लिए "मोदी" जोड़कर "मोदी सरकार" बनाम "मोदी शासन" कर दिया।

जब स्वघोषित लिबरलों के फ़र्ज़ी नैरेटिव ने हत्याएँ करवाई, मंदिर तुड़वाए, दंगे भड़काए

अगर शिकार मुस्लिम या दलित है, तो अपराधी के नाम में पहचान ढूँढी जाती है। मजहब विशेष वालों ने एक-दूसरे को मारा, तो ये मुन्नी बेगम की ग़ज़लें गाने लगते हैं। दलित ने दलित को मारा, तो ये भारतीय नारी किस-किस से, कितनी बार, और कब-कब सेक्स करे, इस चर्चा में लीन हो जाते हैं।

लिल्लाह! फेक न्यूज़ मैंने शेयर की, लेकिन घृणा तो मुआ ऑपइंडिया फैला रहा है: सबा नक़वी

यह पहली बार नहीं है जब किसी सत्ता विरोधी और कॉन्ग्रेस-वादी, चाहे वो पत्रकार हो, लेखक हो, या फिर सोशल मीडिया पर दिन रात सरकार की नीतियों में 'मुस्लिम विरोधी नजरिया' तलाशने वाला कोई कॉन्सपिरेसी थ्योरी एक्टिविस्ट हो, ने अपनी गलती स्वीकार करने की जगह उल्टा अपने दुराग्रहों से दूसरों पर कीचड़ उछालने का काम किया हो।

हिन्दू मंगरू की लिंचिंग पत्रकारिता के समुदाय विशेष के लिए उतनी ‘सेक्सी’ नहीं है

यह चुप्पी केवल आज की नहीं है, केवल मंगरू के मामले में नहीं है। यह हर उस मामले में ओढ़ा गया सन्नाटा है, जब 'डरा हुआ शांतिप्रिय' कोई अपराध करता है, और भुक्तभोगी कोई हिन्दू होता है।

‘द वायर’ वालो, ‘मोदी-विरोधी’ होने से गबन और क़त्ल करने का लाइसेंस नहीं मिलता

अब ये कातिलों से लेकर गबन के आरोपियों का बचाव केवल इस आधार पर करना चाहते हैं कि फलाना मोदी के खिलाफ बोला था, ‘एंटी-RSS’ था, तो अगर इसे जेल भेजा गया तो सरकार के खिलाफ बोलने वालों में ‘डर का माहौल’ बन जाएगा।

टीम इंडिया की नई जर्सी से 2019 के ‘भगवाकरण’ और 2001 में गांगुली के गंडे-ताबीज़ का कनेक्शन जोड़ रहे हैं लिबरल

केवल कोहली और भगवा जर्सी पर नाराज़गी जताने से मन नहीं भरा तो लिबरल गिरोह ने 'समय-यात्रा' कर के मोदी के भगवाकरण प्लान में गांगुली का 2001 में टी-शर्ट लहराना शामिल कर लिया। उनके हिसाब से गांगुली के लॉर्ड्स में टी-शर्ट लहराते समय उनके शरीर पर मौजूद गंडे-ताबीज़ आदि धार्मिक और आस्था के प्रतीक-चिह्न 'शर्मनाक' और 'अंधविश्वासी' थे!

साथी पत्रकार का आरोप- कापड़ी ने अपनी फिल्म बेचने के लिए दुधमुँही बच्ची को गोद लेने का ‘नाटक’ किया

अभिषेक उपाध्याय ने यह भी जोड़ा कि बच्चे को गोद लेना एक शांत प्रक्रिया होती है, ताकि बड़े होकर बच्चे को अपने गोद लिए हुए होने को लेकर किसी असहज स्थिति का सामना न करना पड़े। अतः अगर कापड़ी दम्पति का सच में बच्ची को गोद लेने का इरादा होता, तो वे इतना शोर-शराबा न करते।

‘मोदी ने विज्ञापन रोका’ वाली फ़र्ज़ी खबर ‘सूत्रों के हवाले से’ फैला रहा है पत्रकारिता का समुदाय विशेष

प्रोपेगेंडा-पर-प्रोपेगेंडा फैलाते रहना, बार-बार पकड़े जाते रहना, शर्मिंदा होना- अगर यही बिज़नेस मॉडल है तो बात दूसरी है, वरना वायर वालों को बाज आ जाना चाहिए।

असहिष्णुता? ‘हेट क्राइम’ की दर्जन भर घटनाएँ, जो फर्ज़ी साबित हुईं – लक्ष्य था हिंदुओं को बुरा दिखाना

यहाँ एक निश्चित पैटर्न उभर रहा है। ये उनमें से केवल दर्जन भर घटनाएँ हैं। 'हेट-ट्रैकर’ के माध्यम से नकली 'हेट क्राइम' के निर्माण के लिए मीडिया गिरोह और लिबरल पूरी तरह समर्पित हैं। ये डेटा और फैक्ट को तोड़-मरोड़कर, मुसलमानों को बारहमासी पीड़ित और हिंदुओं को निर्दयी हमलावर बताने की फिराक में रहते हैं।

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