हिन्दू मंगरू की लिंचिंग पत्रकारिता के समुदाय विशेष के लिए उतनी ‘सेक्सी’ नहीं है

तबरेज़ पर चार-चार एंगल से लिखवाने वालों ने या तो मंगरू की मौत को कवर करना ही ज़रूरी नहीं समझा, और अगर लिखा भी गूगल की 'सर्च अल्गोरिथम' और 'न्यूज़ अल्गोरिदम' को 'गेम' कर अपने ही कोरम पूरा करने वाले लेखों को 'दफ़ना' दिया।

दो मॉब लिंचिंग, दो हत्याएँ, दोनों में हत्यारों के झुण्ड पर आरोप- लेकिन दोनों पर मीडिया गिरोह की अलग-अलग कवरेज। तबरेज़ अंसारी की मौत पर रुदाली करने वाले सभी मीडिया गिरोहों में मंगरू की वैसी ही मौत पर सन्नाटा है। क्योंकि मंगरू की मौत में ‘एंगल’ नहीं है। वह मुसलमान नहीं था, जनजातीय था- और न ही उसे मारने वाले तथाकथित ‘अपर कास्ट’ वाले। बल्कि मारने वाले तो पत्रकारिता के समुदाय विशेष के प्रिय समुदाय विशेष के थे- नाम था साजिद, आज़म और रमज़ान।

शायद इसीलिए ‘tabrez’ या ‘tabrez ansari’ के नाम से सर्च करने पर खबरों का अंबार लग जा रहा है, और वहीं ‘mangru’, ‘mangru lynching’, ‘magru’ आदि कुछ भी लिख कर देख लीजिए- खबर या ‘न्यूज़’ ढूँढ़ने को आप तरस जाएँगे। तबरेज़ पर चार-चार एंगल से लिखवाने वालों ने या तो मंगरू की मौत को कवर करना ही ज़रूरी नहीं समझा, और अगर लिखा भी गूगल की ‘सर्च अल्गोरिथम’ और ‘न्यूज़ अल्गोरिदम’ को ‘गेम’ कर अपने ही कोरम पूरा करने वाले लेखों को ‘दफ़ना’ दिया।

एक-एक इमेज को देखिए। ध्यान से। क्लिक करके देखिए। केवल एक ऑपइंडिया के अलावा किसी भी और की मंगरू खान की कवरेज नहीं मिलेगी आपको। टेलीग्राफ़ का एक लेख भूले-भटके आया भी तो उसकी भाषा देखिए। ‘duo’, ‘two youths’। और अब इसे अख़लाक़ से लेकर तबरेज़ तक हर उस मॉब लिंचिंग से तुलना कीजिए, जिसमें हिन्दुओं के हाथों मुसलमानों की, या कथित अपर कास्ट हिन्दुओं के हाथों दलित हिन्दुओं की पिटाई हुई है।

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

चूँकि वह ‘नैरेटिव’ में फिट हो सकने वाली घटना नहीं थी, यह ‘डरा हुआ मुसलमान’ के फर्जीवाड़े का समर्थन नहीं करती, इसलिए पत्रकारिता का समुदाय विशेष मंगरू की हत्या पर चुप है।

यह चुप्पी तब भी थी जब…

यह चुप्पी केवल आज की नहीं है, केवल मंगरू के मामले में नहीं है। यह हर उस मामले में ओढ़ा गया सन्नाटा है, जब ‘डरा हुआ मुसलमान’ कोई अपराध करता है, और भुक्तभोगी कोई हिन्दू होता है।

कालीचक याद है, जब करीब तीन लाख मुसलमानों ने ऐसी आगजनी की कि दंगे जैसे हालात हो गए थे? तब किसी मीडिया गिरोह के न्यूज़रूम ने ‘क्या मुसलमान कट्टर हो रहे हैं?’ का सवाल नहीं पूछा। उसी साल (2016) में बंगाल के कुछ मुसलमानों ने ईद से एक दिन पहले ही ईद का जुलूस निकालना शुरू कर दिया, ताकि हिन्दुओं को मार्गशीर्ष पूर्णिमा मनाने से रोका जा सके। आपत्ति जताने पर हिन्दुओं के घर जला डाले गए और ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ के नारे लगे। वायर ने कितने लेख छापे इस पर?

बाड़मेर के मुसलमानों ने एक अनुसूचित जाति के व्यक्ति को, एक दलित को केवल इसलिए मौत के घाट उतार दिया कि उसने हिन्दू होकर एक मुसलमान लड़की से प्रेम करने की जुर्रत की थी। कहाँ था तब पत्रकारिता का समुदाय विशेष? तमिलनाडु के कुम्भकोणम में रामालिंगम की हत्या कर दी गई। इस बर्बरतापूर्ण हत्या में रामलिंगम के रात में घर लौटते वक़्त कुछ अज्ञात लोगों ने उसके हाथ काट दिए जिससे अत्यधिक रक्स्राव से रामालिंगम की मृत्यु हो गई। एक गर्भवती मुसलमान महिला को केवल इसलिए उसके परिवार ने (जिसमें उसकी माँ भी थी) ज़िंदा जला दिया क्योंकि वह हिन्दू लड़के से शादी कर उसके बच्चे की मॉं बनने वाली थी

ऐसी घटनाएँ दर्जनों हैं– मैं गिना-गिना कर थक जाऊँगा, आप लिंक खोलकर पढ़ते-पढ़ते। इन सब घटनाओं में लेकिन जो चीज़ समान है, वह है मीडिया का सन्नाटा। कहीं मुस्लिमों में फैले कट्टरपंथ पर चर्चा करना तो दूर, कभी इन घटनाओं के अस्तित्व पर ही मौन साध लिया जाता है, कभी इनमें ‘कम्यूनल एंगल’ का होना नकारा जाता है, कभी यह ज्ञान दिया जाता है कि कुछ लोगों की करनी से करोड़ों लोगों को नहीं तौलना चाहिए। लेकिन जहाँ कहीं मामला ‘पलटने’ की ‘महक’ भर आ जाए, भूखे लकड़बग्घे की तरह झपटते हुए पत्रकारिता का समुदाय विशेष अपना ही ज्ञान बिसरा जाता है।

‘आआआह… हिन्दू फ़ासीवाद’

चाहे मेरठ के एक कॉलेज की मुसलमान छात्रा मज़हबी उत्पीड़न का संदेहास्पद दावा करे, घटना रोड रेज में हुई मारपीट की हो (जो दिल्ली-एनसीआर का एक कुरूप और निंदनीय पर बिलकुल ‘सेक्युलर’ सच है), या एक मुसलमान ने ही दूसरे मुस्लिम को भूमि-विवाद में मार दिया हो- मीडिया गिरोह ने हर उस घटना में हिन्दुओं को बदनाम करने का भरसक प्रयास किया है, जहाँ मुसलमान ‘विक्टिम’ हो। न उस समय न्याय का सिद्धांत ज़रूरी रहा, न ये याद रखना ज़रूरी समझा कि मीडिया ट्रायल नहीं होना चाहिए। यहाँ तक कि घटनाओं के फ़र्ज़ी निकलने पर भी प्रपंच बंद नहीं हुआ।

हत्या हत्या होती है, निंदनीय और दंडनीय होती है

कानून का फैसला आने के पहले तक कोई भी यकीन के साथ नहीं कह सकता कि तबरेज़ अंसारी को चोर होने के कारण मार डाला गया या मुसलमान होने के कारण- जुनैद के मामले में आखिर यही हुआ था; सीट-विवाद में हुई हत्या को बेवजह हिन्दू-मुस्लिम ‘एंगल’ दे दिया गया था। और मीडिया गिरोह ने ‘अलिखित’ नियम स्थापित कर दिया था कि मुसलमान की तो जान इतनी कीमती है कि उसमें ‘रिलिजियस एंगल’ ज़मीन खोद कर लाया जाए, अगर मामले को खोदने भर से न मिले; लेकिन एक हिन्दू की जान की इतनी कीमत नहीं है कि मज़हबी कारण से भी उसका क़त्ल होने पर मज़हबी कारण को उजागर किया जाए।

हर इंसान की जान इस देश के संविधान में बराबर आँकी गई है। बेहतर होगा कि मीडिया गिरोह दोगलापन बंद कर उस संविधान की कम-से-कम इस एक बात को खुद मानना शुरू कर दे, जिस संविधान का हवाला दे वह हर समय हर असहमति का गला ‘आप तो संविधान के ख़िलाफ़ हैं मतलब’ कह कर दबाता रहता है।

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by paying for content

यू-ट्यूब से

बड़ी ख़बर

गुस्साए गाँव वालों ने अंसारी से गाय के पाँव छूकर माफी माँगने को कहा, लेकिन जैसे ही अंसारी वहाँ पहुँचा, गाय उसे देखकर डर गई और वहाँ से भाग गई। गाय की व्यथा देखकर गाँव वाले उससे बोले, "ये भाग रही है क्योंकि ये तुमसे डर गई। उसे लग रहा है कि तुम वही सब करने दोबारा आए हो।"

ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

फेक पहचान से शादी

हीना ख़ान ने गीता बन कर पुजारी से रचाई शादी, अगले दिन भागने की कोशिश में गिरफ़्तार

गाँव के मंदिर का पुजारी अशोक कई दिनों से अपनी शादी के प्रयास में था। इसका फायदा उठाते हुए दलाल नारायण ने उस से सवा लाख रुपए ठग लिए और एक मुस्लिम महिला से मिलवाया। पुजारी को धोखे में रखने के लिए महिला का नाम गीता बताया गया।
कुरान रिचा राँची

ऋचा भारती को आप ने कहा क़ुरान बाँटो, उसे ‘रंडी साली’, ‘फक योर सिस्टर’ कहने वाले क्या बाँटें मी लॉर्ड?

हो सकता है अंजुमन इस्लामिया वालों को ‘फक योर सिस्टर’ का या ‘तेरी माँ मेरी रखैल’ आदि का मतलब मालूम न हो, लेकिन कोर्ट के जजों को तो ज़रूर पता होगा कि इन शब्दों से एक लड़की की ‘मोडेस्टी आउटरेज’ होती है। और यह क़ानूनन जुर्म है।
राजस्थान, महिला, हत्या, होटल

जिस रफीक के साथ शादी करने को घर से भागी महिला, उसी ने होटल में गला घोंट मार डाला

मध्य प्रदेश की शाहिस्ता, रफीक के साथ घर से भागी। उन्होंने अजमेर के होटल में ठहरने के लिए कमरा लिया। दोनों यहाँ शादी करने के लिए आए थे, जिसके लिए उन्होंने वकील से भी बात की थी। लेकिन किसी बात को लेकर दोनों में कहासुनी हो गई और...
तापसी

एक हिंदू लड़की मुस्लिम Live-In पार्टनर के द्वारा मार दी जाती है और तापसी पन्नू को मजाक सूझ रहा है!

एक हिंदू लड़की को उसके मुस्लिम बॉयफ्रेंड द्वारा बर्बर तरीके से मार दिया जाता है और तुम्हें मजाक सूझ रही है। अगर यह उल्टा होता तो फेविकॉल पी के शांत बैठी रहती। मौत पर व्यंग्य करके इंसान गिरने की सीमा से भी परे होकर गिर जाता है।
मौलवी

AMU की मस्जिद में नमाज पढ़ाने वाले मौलाना ने 9 साल की बच्ची को बनाया हवस का शिकार

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मोज्जिन के पद पर तैनात मौलवी द्वारा 9 साल की नाबालिग के साथ डरा धमकाकर दुष्कर्म के मामले में मुकदमा दर्ज कर आरोपित के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। वहीं, एएमयू मेंबर इंचार्ज साफे किदवई ने बताया कि शिकायत मिलने पर मौलाना को तत्काल पद से हटा दिया गया है और रिपोर्ट तलब की जा रही है।
कुरान राँची कोर्ट

‘बाँटनी होगी कुरान’- जमानत के लिए कोर्ट के इस शर्त को मानने से ऋचा भारती ने किया इनकार

ऋचा ने कहा, "आज कुरान बाँटने का आदेश दिया गया है, कल को इस्लाम स्वीकार करने या नमाज पढ़ने का आदेश देंगे तो वह कैसे स्वीकार किया जा सकता है। क्या किसी मुसलमान को सजा के तौर पर दुर्गा पाठ करने या हनुमान चालीसा पढ़ने का आदेश कोर्ट ने सुनाया है?"
विमल-ज़ुबाँ केसरी

अजय देवगन के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट करना शख्स को पड़ा मँहगा, जज ने पूरे कानपुर में विमल बाँटने का दिया आदेश

अदालत ने आपत्तिजनक पोस्ट लिखने वाले उस युवक को अगले एक साल तक कानपुर के हर गली-मोहल्ले में 'विमल' बाँटने की सजा सुना दी है और साथ ही उन्हें 'बोलो जुबाँ केसरी' के नारे भी लगाने होंगे।
मुगल कुशासन

‘मुगलों ने हिंदुस्तान को लूटा ही नहीं, माल बाहर भी भेजा, ये रहा सबूत’

1659 में औरंगज़ेब के मक्का को 600,000 रुपए देने का ज़िक्र करते हुए True Indology ने बताया है कि उस समय एक रुपए में 280 किलो चावल आता था। यानी करीब 2 लाख टन चावल खरीदे जाने भर का पैसा औरंगज़ेब ने हिन्दुस्तानियों से लूट कर मक्का भेजा।
गाय, दुष्कर्म, मोहम्मद अंसारी, गिरफ्तार

गाय के पैर बाँध मो. अंसारी ने किया दुष्कर्म, नारियल तेल के साथ गाँव वालों ने रंगे हाथ पकड़ा: देखें Video

गुस्साए गाँव वालों ने अंसारी से गाय के पाँव छूकर माफी माँगने को कहा, लेकिन जैसे ही अंसारी वहाँ पहुँचा, गाय उसे देखकर डर गई और वहाँ से भाग गई। गाय की व्यथा देखकर गाँव वाले उससे बोले, "ये भाग रही है क्योंकि ये तुमसे डर गई। उसे लग रहा है कि तुम वही सब करने दोबारा आए हो।"
मीडिया गिरोह

तख्ती गैंग, मौलवी क़ुरान पढ़ाने के बहाने जब रेप करता है तो कौन सा मज़हब शर्मिंदा होगा?

बात चाहे हस्तमैथुन और ऑर्गेज़्म के जरिए महिलाओं के अधिकारों की बात करने वाली स्वरा भास्कर की हो या फिर उन्हीं के जैसी काम के अभाव में सोशल मीडिया पर एक्टिविस्ट्स बने फिर रहे अन्य मीडिया गिरोह हों, सब जानते हैं कि उन्हें कब कैंडल बाहर निकालनी है और किन घटनाओं का विरोध करना है।

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

57,421फैंसलाइक करें
9,740फॉलोवर्सफॉलो करें
74,819सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

शेयर करें, मदद करें: