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मीडिया गिरोह

AIB की बकचो# वापसी: बच्ची को गाँजा पिला कर चलाना चाहता है कॉमेडी की दुकान

AIB ने यह साबित कर दिया है कि यह कुछ ऐसे लोगों का समूह है, जिनके पास रचनात्मकता के नाम पर ना ही पहले कुछ विशेष था और ना ही अब। आज के इस एडिटेड वीडियो से AIB ने जता दिया है कि उनसे नैतिक मूल्यों की उम्मीद करना आज भी अतार्किक ही है।

‘जय श्री राम के नारे से माहौल दूषित हुआ’ – इंडिया टुडे की इस रिपोर्ट को सोशल मीडिया पर पड़ी लताड़

क्या किसी कार्यक्रम में 'जय श्री राम' का नारा लगने से माहौल दूषित हो जाता है? क्या 'जय श्री राम' बोलना आसपास के वातावरण को बिगाड़ देता है? सोशल मीडिया पर यूजर्स ने इंडिया टुडे से ऐसे कई सवाल पूछे।

दीमक, दोगली, बिकाऊ, 10वीं फेल, सूडो लिबरल, नालायकों, देशद्रोहियों… मीडिया के एक सेक्शन पर कंगना

“मीडिया का एक सेक्शन है जो दीमक की तरह हमारे देश में लगा है। ये जो दोगली मीडिया है, बिकाऊ मीडिया है, जो ख़ुद को लिबरल कहती है, सेकुलर कहती है और कुछ भी नहीं है दसवीं फेल है... ये लोग सूडो लिबरल हैं और ये लोग बिल्कुल भी सेकुलर नहीं हैं।”

‘जय श्री राम’ कत्ल का नारा! हिन्दूफ़ोबिया से ग्रसित सिर्फ BBC नहीं, Western Media की लम्बी फेहरिस्त

1. हिंदू अपराध करे तो पूरा हिंदुस्तान 'लिंचिस्तान', Pak के मजहब वालों का पाप ढकने के लिए उन्हें 'एशियन' बताना 2. खुले में शौच के लिए हिन्दू धर्म शास्त्र ज़िम्मेदार 3. हिंदुओं पर स्टोरी के लिए मानव-माँस खाते अघोरियों को दिखाना - हिन्दूफ़ोबिया से ग्रसित अंतरराष्ट्रीय मीडिया को समझने के लिए ये तो बस कुछ उदाहरण हैं। इनके कारनामों की लिस्ट बहुत लंबी है।

Fact Check: वित्त मंत्रालय में पत्रकारों के प्रवेश पर लगा प्रतिबन्ध? ‘गिरोह विशेष’ के झूठ की खुली पोल

कई पत्रकारों व 'गिरोह विशेष' ने इसे मीडिया पर सरकार द्वारा हमला के रूप में प्रचारित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने ऐसा दिखाने की कोशिश की कि सरकार मीडिया से डर गई है और पत्रकारों को मंत्रालय में नहीं घुसने दे रही है। लेकिन, इनके झूठ की पोल खुल गई।

डियर सेकुलरों, जिन्हें बाँधकर गौ माता की जय बुलवाया गया, वे ‘सिर्फ़ 25 लोग’ नहीं… बल्कि गौ तस्कर थे

मीडिया संस्थानों ने भी गौ तस्करी के इस मामले को इस प्रकार पेश किया जैसे गायों को वाहनों के जरिए ले जाने वाले लोग 'निर्दोष पशु व्यापारी' थे, जिन्हें कुछ गौ रक्षकों ने पकड़कर प्रताड़ित किया।

VHP ने जारी की एंटी-हिन्दू हेट क्राइम की सूची, कहा- इतिहास बताता है रक्तपात किसकी प्रवृत्ति है

विहिप ने यह भी कहा कि इतिहास और वर्तमान की घटनाएँ स्पष्ट कर देतीं हैं कि गैर-मतावलम्बी का रक्तपात किसके प्रवृत्ति और मज़हबी कर्त्तव्य हैं।

सबा नकवी और ट्रिब्यून वालो, जब से तुम पैदा हुए हिन्दुओं का इतिहास तभी से शुरू नहीं होता

रामायण और राम के नए विशेषज्ञ पैदा हुए हैं, जो झूठ की खेती से उपजे मक्कारी भरे फ़सल को दिखा कर हमें यह बता रहे हैं कि 'श्री' ग़लत है और 'सिया' सही है। अब हिन्दुओं को इनसे सीखना पड़ेगा कि शिव को 'महादेव' कहना है या 'भोलेनाथ'। ग़लत इतिहास बताने वाले ट्रिब्यून के लेख का भंडाफोड़।

शेखर गुप्ता के The Print का रिपोर्टिंग के नाम पर फर्जीवाड़ा, लेखक ने अपने शब्दों के साथ खिलवाड़ पर लताड़ा

लेखक ने अपने भाषण में अरबी-फारसी शब्दों के इस्तेमाल से बचने और उनकी जगह हिन्दी का इस्तेमाल करने की सलाह दी थी। लेकिन, कृतिका शर्मा ने कई जगहों पर अपनी सहूलियत से फ़ारसी को 'उर्दू' कर दिया। नित्यानंद मिश्र का यह भी कहना है कि उन्होंने केवल "शासन/प्रभुत्व" बनाम "सरकार" शब्दों की बात की थी, लेकिन कृतिका ने रिपोर्ट को सनसनीखेज़ बनाने के लिए "मोदी" जोड़कर "मोदी सरकार" बनाम "मोदी शासन" कर दिया।

जब स्वघोषित लिबरलों के फ़र्ज़ी नैरेटिव ने हत्याएँ करवाई, मंदिर तुड़वाए, दंगे भड़काए

अगर शिकार मुस्लिम या दलित है, तो अपराधी के नाम में पहचान ढूँढी जाती है। मजहब विशेष वालों ने एक-दूसरे को मारा, तो ये मुन्नी बेगम की ग़ज़लें गाने लगते हैं। दलित ने दलित को मारा, तो ये भारतीय नारी किस-किस से, कितनी बार, और कब-कब सेक्स करे, इस चर्चा में लीन हो जाते हैं।

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