किसानों ने कहा कि टिड्डियों के हमले के कारण वे पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि उनके घर में खाने के लिए रोटी तक नहीं बचा है। कर्जमाफी का वादा पूरा न किए जाने से किसान पहले से ही बेहाल है। मुख्यमंत्री के सामने कई किसान अचानक से रो पड़े।
एक साल में 940 बच्चों की मौत। मुख्यमंत्री गहलोत कहते हैं कि ये कोई नई बात नहीं। वो हेमंत सोरेन के शपथ ग्रहण समारोह में व्यस्त हैं। मीडिया चुप है क्योंकि ये भाजपा शासित राज्य में नहीं हुआ है। जाँच में पता चला है कि अस्पताल में व्यवस्थाएँ लचर हैं। अगर बच्चे मरते रहें तो सरकार किस लिए?
2 दिन में 10, 1 महीने में 77 बच्चों की मौत। ये आपके लिए भले बच्चे हों। लेकिन, राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार के लिए बस नंबर हैं। जिन्हें गिनकर उसने बता दिया है कि इस बार सबसे कम मरे हैं। यह भी बताया है कि अस्पतालों में रोज दो-चार मरते ही हैं, कोई नई बात नहीं है।
"नैशनल एनआईसीयू रेकॉर्ड के अनुसार, शिशुओं की 20 प्रतिशत मौतें स्वीकार्य हैं, जबकि कोटा में शिशु मृत्यु दर 10 से 15 प्रतिशत है जो खतरनाक नहीं है क्योंकि अधिकतर बच्चों को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था।"
व्याख्याता परीक्षा का मुद्दा राजस्थान में गरमा गया है। छात्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री इसे इगो का मुद्दा बना रहे हैं। गौर करने लायक बात यह है कि ज्यादातर नाराज़ छात्र मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समर्थक हैं।
स्पेशल कोर्ट ने बुधवार को मोहम्मद सैफ, मोहम्मद सरवर आजम, सैफुर्रहमान और मोहम्मद सलमान को दोषी करार दिया था। इस ब्लास्ट के 2 अन्य आरोपित दिल्ली के बटला हाउस में 2008 में हुए एनकाउंटर में मार गिराए गए थे। एक आरोपित शाहबाज हुसैन को अदालत ने...
जयपुर सीरियल ब्लास्ट के 2 अन्य आरोपितों को दिल्ली के बटला हाउस में 2008 में हुए एनकाउंटर में मार गिराया गया था। एक आरोपित शाहबाज हुसैन को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। इन धमाकों में 71 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 185 लोग घायल हुए थे।
पीड़िता ने 10 नवंबर को दुष्कर्म की शिकायत की थी। पुलिस मामले की जॉंच के लिए उसे नासिक लेकर गई। लेकिन, आरोपित पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसका फायदा उठाकर आरोपित ने उसके पिता को मौत के घाट उतार दिया।
पायल को बूॅंदी पुलिस ने रविवार को अहमदाबाद स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया था। उन पर नेहरू को लेकर सोशल मीडिया में आपत्तिजनक पोस्ट करने का आरोप है। गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थन में सोशल मीडिया में 'आई स्टैंड विथ पायल रोहतगी' ट्रेंड करने लगा था।
पायल रोहतगी सोशल मीडिया में वीडियो के जरिए अपनी बात रखती रहती हैं। उन पर नेहरू को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप है। उनकी गिरफ्तारी के बाद से ट्रेंड हो रहा है 'आई स्टैंड विथ पायल रोहतगी'।