Thursday, October 1, 2020
Home विचार राजनैतिक मुद्दे ‘अगस्त में बच्चे मरते ही हैं’ और ‘बच्चों की मौत कोई नई बात नहीं’...

‘अगस्त में बच्चे मरते ही हैं’ और ‘बच्चों की मौत कोई नई बात नहीं’ के बीच मीडिया की नंगी सच्चाई

"हम स्वास्थ्य के क्षेत्र में राजस्थान को सिरमौर बनाने के लिए लगे हुए हैं" - यह मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लिखा है। लेकिन साल भर में 940 बच्चों की मौत को 'नई बात नहीं' कह कर टाल देते हैं। 'निष्पक्ष' मीडिया भी चुप क्योंकि यह उनके प्रोपेगेंडा में शामिल नहीं।

प्रदेश के हर अस्पताल में प्रत्येक दिन 3-4 मौतें होती हैं। यह कोई नई बात नहीं है। इस साल पिछले 6 सालों के मुकाबले सबसे कम मौतें हुई हैं। मेरे पास इसके आँकड़े हैं। इस साल केवल 900 मौतें हुई हैं। एक भी बच्चे की मौत दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन इससे पहले तक़रीबन 1400 और 1500 मौतें भी हुई हैं। 900 भी क्यों हुई हैं, वह भी नहीं होनी चाहिए। मैंने जाँच कराई है। एक्शन भी लिया है। अपनी सरकार के पिछले टर्म में भी मैंने अस्पतालों के ऑपरेशन थिएटर को लंबे अंतराल के बाद अपग्रेड कराया था।

ये बयान है उस व्यक्ति था, जिस पर देश के सबसे बड़े राज्य का दारोमदार है। अशोक गहलोत कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं, जो तीसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में काम कर रहे हैं। अब तक वो 11 साल इस कुर्सी पर बीता चुके हैं। और उनके पास अपने पिछले (2008-13) या उससे भी पिछले (1998-03) कार्यकाल की उपलब्धियों को गिनाने के नाम पर यही है कि उन्होंने ऑपरेशन थिएटरों को अपग्रेड कराया है। अशोक गहलोत के लिए 900 बच्चों की जान जाना कोई ‘नई बात’ नहीं है। इसके पीछे उनका तर्क ये है कि पहले इससे भी ज़्यादा मौतें हुई हैं।

अगर इससे पहले भी ज़्यादा मौतें हुई हैं तो क्या इसके लिए अशोक गहलोत ज़िम्मेदार नहीं है, जो इससे पहले मुख्यमंत्री के रूप में 2 बार अपना कार्यकाल पूरा कर चुके हैं? राज्य में बसपा विधायक दल को 2 बार पूरा का पूरा तोड़ देने वाले गहलोत राजनीति में सिद्धहस्त माने जाते हैं लेकिन मुख्यमंत्री के रूप में उनका ये बयान बताता है कि वो एक प्रशासक के रूप में विफल रहे हैं। ये वही गहलोत हैं, जो बिहार के मुजफ्फरपुर में इंसेफ्लाइटिस से बच्चों की मौत पर दुःख जता रहे थे। दुःख जताना अच्छी बात है लेकिन किसी घटना से न सीखना और उस पर राजनीति करना सही नहीं है। आज यही गहलोत दूसरों पर अफवाह फैलाने का आरोप मढ़ रहे हैं।

दरअसल, मामला राजस्थान के कोटा में 1 महीने में 77 बच्चों की मौत का है। शुक्रवार (दिसंबर 27, 2019) तक सिर्फ़ एक सप्ताह में 12 बच्चों की जानें जा चुकी थीं। जेके लोन हॉस्पिटल ने बताया है कि इस साल बच्चों की मौत का आँकड़ा 940 है। अस्पताल प्रशासन कह रहा है कि ये असामान्य घटना है जबकि राज्य के मुख्यमंत्री कहते हैं कि नई बात नहीं है। जब मामला हाथ से बाहर हो गया, तब राज्य के गृह सचिव को वस्तुस्थिति का जायजा लेने भेजा गया। कोटा के सांसद और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी राज्य सरकार को इस मामले में संवेदनशीलता से कार्य करने की सलाह दी है।

मुख्यमंत्री का बयान संवेदनहीन है क्योंकि राजस्थान के गृह सचिव वैभव गालरिया ने प्रारंभिक जाँच में पाया है कि हॉस्पिटल के सिस्टम में, इंफ्रास्ट्रक्चर में काफ़ी गड़बड़ियाँ हैं। हॉस्पिटल के नवजात शिशु वाले आईसीयू में ऑक्सीजन सप्लाई सही नहीं है। संक्रमण से बचने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है और ज़रूरी दवाओं का अभाव है। साफ़ ज़ाहिर होता है कि मुख्यमंत्री अपनी सरकार की विफलताओं पर पर्दा डालने के लिए ऐसे बयान दे रहे हैं। अफ़सोस ये कि मुजफ्फरपुर की तरह (जहाँ सत्ताधीशों से ज़्यादा डॉक्टरों से सवाल-जवाब किया गया) यहाँ सवाल पूछने के लिए मीडिया का आभाव है।

2017 में यूपी में भी कुछ ऐसा हुआ था। तब राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा था कि हर साल अगस्त में बच्चों के मरने की संख्या बढ़ जाती है। इसे रोकने का जिम्मा किसके पास होता है? सरकार के पास। अगर सिर्फ आँकड़ों की ही बात की जाए तो भाजपा नेता और गहलोत, दोनों के बयान सच हैं, लेकिन संवेदनशीलता की कसौटी पर ये बयान निष्ठुर और संवेदनहीन ही कहे जाएँगे। ऐसा नहीं है कि उन बच्चों का मरना जरूरी है, बल्कि सरकारों का काम है मृत्यु दर घटाना।

सारी बात यह है कि मीडिया के लिए हमेशा की तरह मुद्दा ‘बच्चों की मौत’ की जगह, ‘भाजपा सरकार में बच्चों की मौत’ और ‘भाजपा नेता का संवेदनहीन बयान’ है। इसी सेलेक्टिव आउटरेज का कारण है कि जब एक राज्य में ऐसी घटना होती है तो दूसरा राज्य उससे सीखने की चेष्टा नहीं करता बल्कि सोचता है कि जब ‘होगा तो देखा जाएगा’।

मेनस्ट्रीम मीडिया और कथित संवेदनशील बुद्धिजीवी तथा लिबरल गिरोह जो किसी माँ के हाथ में बच्चे की नाक में लगी ऑक्सीजन पाइप वाली तस्वीर दिखा कर संवेदना दिखा रहा था, आज वो चुप हैं क्योंकि कॉन्ग्रेस के सरकार में बच्चों का इस संख्या में मरना जायज है। इस देश के मीडिया की दुर्गति यही है कि जब तक ‘भाजपा’ वाला धनिया का पत्ता न छिड़का गया हो, इन्हें न तो दलित की मौत पर कुछ कहना है, न बड़ी संख्या में नवजात शिशुओं की मृत्यु पर इन्हें वो ज़ायक़ा मिल पाता है।

कुल मिला कर ये लोग भाजपा सरकारों में नकारात्मक खबरों के लिए प्रार्थना करते हैं, जबकि गैर-भाजपा सरकार में बंगाल जले, मध्य प्रदेश में लोन माफी या बेरोजगारी भत्ता न मिले, राजस्थान में बच्चे मरें, नौकरियों पर सवाल हों, ये बस चुप रहते हैं। जिस तरह मुजफ्फरपुर और गोरखपुर में बच्चों की मौत को लेकर मीडिया रिपोर्टिंग हुई, उसी तरह कोटा मामले में भी होनी चाहिए। चाहे वो योगी सरकार हो, नीतीश सरकार हो या गहलोत की, इतनी बड़ी संख्या में अगर बच्चों की मौत को मीडिया भाजपा और गैर-भाजपा के चश्मे से देखता है तो यह एक भयावह ट्रेंड है।

जहाँ तक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की बात है, उनका ट्विटर हैंडल चेक करने पर आपको उत्तर प्रदेश में सीएए के ख़िलाफ़ आगजनी और हिंसा करने वालों की बातें दिखेंगी। उनके बचाव में योगी की आलोचना है। योगी को क्या करना चाहिए था, ऐसे कुछ सलाह हैं। प्रियंका गाँधी के साथ यूपी में दुर्वव्यवहार किए जाने का आरोप है। उस पर तो पूरा का पूरा बयान है, वीडियो के माध्यम से। बच्चों की मौत के बीच गहलोत झारखण्ड भी पहुँचे, जहाँ उन्होंने हेमंत सोरेन के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लिया। बच्चों की मौत को लेकर भी उनके बयान हैं ट्विटर हैंडल पर, जरा गौर कीजिए:

“हम स्वास्थ्य के क्षेत्र में राजस्थान को सिरमौर बनाने के लिए लगे हुए हैं”

48 घंटों में 10, एक महीने में 77 बच्चों की मौत: राजस्थान के डॉ कह रहे – सब मौतें सामान्य, अस्पताल की लापरवाही नहीं

RSS की किस शाखा में जाते हो? राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार ने कर्मचारियों से पूछा

सर्वे रिपोर्ट: मोदी-राज में एक साल में 10% घटी रिश्वतखोरी, बिहार-राजस्थान टॉप पर

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अनुपम कुमार सिंहhttp://anupamkrsin.wordpress.com
चम्पारण से. हमेशा राइट. भारतीय इतिहास, राजनीति और संस्कृति की समझ. बीआईटी मेसरा से कंप्यूटर साइंस में स्नातक.

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘हर कोई डिम्पलधारी को गिरने से रोकता रहा, लेकिन बाबा ने डिसाइड कर लिया था कि घास में तैरना है तो कूद गया’

हा​थरस केस पर पॉलिटिक्स करने गए राहुल गाँधी का एक वीडियो के सामने आने के बाद ट्विटर पर 'एक्ट लाइक पप्पू' ट्रेंड करने लगा।

दिल्ली दंगों की चार्जशीट में कपिल मिश्रा ‘व्हिसल ब्लोअर’ नहीं: साजिश से ध्यान हटाने के लिए मीडिया ने गढ़ा झूठा नैरेटिव

दंगों पर दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में कपिल मिश्रा को 'व्हिसल ब्लोअर' नहीं बताया गया है। जानिए, मीडिया ने कैसे आपसे सच छिपाया।

‘द वायर’ की परमादरणीया पत्रकार रोहिणी सिंह ने बताया कि रेप पर वैचारिक दोगलापन कैसे दिखाया जाता है

हाथरस में आरोपित की जाति पर जोर देने वाली रोहिणी सिंह जैसी लिबरल, बलरामपुर में दलित से रेप पर चुप हो जाती हैं? क्या जाति की तरह मजहब अहम पहलू नहीं होता?

रात 3 बजे रिया को घर छोड़ने गए थे सुशांत, सुबह फँदे से लटके मिले: डेथ मिस्ट्री में एक और चौंकाने वाला दावा

रिया चकवर्ती का दावा रहा है कि 8 जून के बाद उनका सुशांत से कोई कॉन्टेक्ट नहीं था। लेकिन, अब 13 जून की रात दोनों को साथ देखे जाने की बात कही जा रही है।

‘कागज नहीं दिखाएँगे’ वाले अनुराग कश्यप कागजों का पुलिंदा लेकर पहुँचे पुलिस स्टेशन: अभिनेत्री के यौन शोषण का मामला

वर्सोवा थाने पहुँचे अनुराग कश्यप के हाथ में कागज का पुलिंदा देख लोग पूछ रहे हैं कि जब उन्होंने अपने सारे डॉक्यूमेंट्स जला दिए थे तो कागज कहाँ से आए।

बारां की नाबालिग लड़कियों ने कैमरे पर बताया- उनके साथ 3 दिनों तक हुआ रेप, CM गहलोत ने कहा- ‘नहीं हुई जबरदस्ती’

राजस्थान के बारां से दो नाबालिग लड़कियों को अगवा कर कोटा, जयपुर और अजमेर ले जाया गया और तीन दिनों तक उनके साथ बलात्कार किया गया था।

प्रचलित ख़बरें

ईशनिंदा में अखिलेश पांडे को 15 साल की सजा, कुरान की ‘झूठी कसम’ खाकर 2 भारतीय मजदूरों ने फँसाया

UAE के कानून के हिसाब से अगर 3 या 3 से अधिक लोग कुरान की कसम खाकर गवाही देते हैं तो आरोप सिद्ध माना जा सकता है। इसी आधार पर...

व्यंग्य: दीपिका के NCB पूछताछ की वीडियो हुई लीक, ऑपइंडिया ने पूरी ट्रांसक्रिप्ट कर दी पब्लिक

"अरे सर! कुछ ले-दे कर सेटल करो न सर। आपको तो पता ही है कि ये सब तो चलता ही है सर!" - दीपिका के साथ चोली-प्लाज्जो पहन कर आए रणवीर ने...

‘हिन्दू राष्ट्र में आपका स्वागत है, बाबरी मस्जिद खुद ही गिर गया था’: कोर्ट के फैसले के बाद लिबरलों का जलना जारी

अयोध्या बाबरी विध्वंस मामले में कोर्ट का फैसला आने के बाद यहाँ हम आपके समक्ष लिबरल गैंग के क्रंदन भरे शब्द पेश कर रहे हैं, आनंद लीजिए।

एंबुलेंस से सप्लाई, गोवा में दीपिका की बॉडी डिटॉक्स: इनसाइडर ने खोल दिए बॉलीवुड ड्रग्स पार्टियों के सारे राज

दीपिका की फिल्म की शूटिंग के वक्त हुई पार्टी में क्या हुआ था? कौन सा बड़ा निर्माता-निर्देशक ड्रग्स पार्टी के लिए अपनी विला देता है? कौन सा स्टार पत्नी के साथ मिल ड्रग्स का धंधा करता है? जानें सब कुछ।

शाम तक कोई पोस्ट न आए तो समझना गेम ओवर: सुशांत सिंह पर वीडियो बनाने वाले यूट्यूबर को मुंबई पुलिस ने ‘उठाया’

"साहिल चौधरी को कहीं और ले जाया गया। वह बांद्रा के कुर्ला कॉम्प्लेक्स में अपने पिता के साथ थे। अभी उनकी लोकेशन किसी परिजन को नहीं मालूम। मदद कीजिए।"

लड़कियों को भी चाहिए सेक्स, फिर ‘काटजू’ की जगह हर बार ‘कमला’ का ही क्यों होता है रेप?

बलात्कार आरोपित कटघरे में खड़ा और लोग तरस खा रहे... सबके मन में बस यही चल रहा है कि काश इसके पास नौकरी होती तो यह आराम से सेक्स कर पाता!

1000 साल लगे बाबरी मस्जिद वहीं बनेगी: SDPI नेता तस्लीम रहमानी ने कहा- अयोध्या पर गलत था SC का फैसला

SDPI के सचिव तस्लीम रहमानी ने अयोध्या में फिर से बाबरी मस्जिद बनाने की धमकी दी है। उसने कहा कि बाबरी मस्जिद फिर से बनाई जाएगी, भले ही 1000 साल लगें।

मिलिए, छत्तीसगढ़ के 12वीं पास ‘डॉक्टर’ निहार मलिक से; दवाखाना की आड़ में नर्सिंग होम चला करता था इलाज

मामला छत्तीसगढ़ के बलरामपुर का है। दवा दुकान के पीछे चार बेड का नर्सिंग होम और मरीज देख स्वास्थ्य विभाग की टीम अवाक रह गई।

‘हर कोई डिम्पलधारी को गिरने से रोकता रहा, लेकिन बाबा ने डिसाइड कर लिया था कि घास में तैरना है तो कूद गया’

हा​थरस केस पर पॉलिटिक्स करने गए राहुल गाँधी का एक वीडियो के सामने आने के बाद ट्विटर पर 'एक्ट लाइक पप्पू' ट्रेंड करने लगा।

दिल्ली दंगों की चार्जशीट में कपिल मिश्रा ‘व्हिसल ब्लोअर’ नहीं: साजिश से ध्यान हटाने के लिए मीडिया ने गढ़ा झूठा नैरेटिव

दंगों पर दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में कपिल मिश्रा को 'व्हिसल ब्लोअर' नहीं बताया गया है। जानिए, मीडिया ने कैसे आपसे सच छिपाया।

फोरेंसिक रिपोर्ट से रेप की पुष्टि नहीं, जान-बूझकर जातीय हिंसा भड़काने की कोशिश हुई: हाथरस मामले में ADG

एडीजी प्रशांत कुमार ने बताया है कि हाथरस केस में फोरेंसिक रिपोर्ट आ गई है। इससे यौन शोषण की पुष्टि नहीं होती है।

‘द वायर’ की परमादरणीया पत्रकार रोहिणी सिंह ने बताया कि रेप पर वैचारिक दोगलापन कैसे दिखाया जाता है

हाथरस में आरोपित की जाति पर जोर देने वाली रोहिणी सिंह जैसी लिबरल, बलरामपुर में दलित से रेप पर चुप हो जाती हैं? क्या जाति की तरह मजहब अहम पहलू नहीं होता?

रात 3 बजे रिया को घर छोड़ने गए थे सुशांत, सुबह फँदे से लटके मिले: डेथ मिस्ट्री में एक और चौंकाने वाला दावा

रिया चकवर्ती का दावा रहा है कि 8 जून के बाद उनका सुशांत से कोई कॉन्टेक्ट नहीं था। लेकिन, अब 13 जून की रात दोनों को साथ देखे जाने की बात कही जा रही है।

‘ये मेरा आखिरी अभियान होगा’: चीन बॉर्डर का शॉर्ट रूट खोज रहे थे रिटायर BSF अधिकारी, पहाड़ों पर ही हुई मौत

एससी नेगी को रिटायर हुए बीएसएफ से 10 साल हो गए थे। फिर भी वे एक अभियान पर निकले और राष्ट्र सेवा में प्राण अर्पित कर दिए।

16 साल की बेटी को 1 साल से हवस का शिकार बना रहा था गुलाम रसूल, गर्भवती होने पर हुआ खुलासा

आरोपित अब्बू, गुलाम रसूल ने पिछले 1 साल से अपनी ही 16 साल की बेटी को हवस शिकार बनाया। वहीं लगातार दुष्कर्म के बाद जब उसकी बेटी 7 माह गर्भवती हो गई तब मामले का खुलासा हुआ।

हाथरस पर पॉलिटिक्स करते भाई-बहन गिरफ्तार, पुलिस से धक्का-मुक्की के बाद झाड़ियों में गिरे राहुल गाँधी

कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ताओं की भीड़ को जब पुलिस द्वारा रोका गया तो दोनों भाई-बहन अपने कार्यकर्ताओं के साथ पैदल ही निकल पड़े। इस बीच खबर आ रही है कि राहुल गाँधी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

हमसे जुड़ें

267,758FansLike
78,089FollowersFollow
326,000SubscribersSubscribe