संसद में कॉन्ग्रेस बिना छपी किताब का सहारा लेकर सरकार और प्रधानमंत्री को बदनाम करने की कोशिश की। लेकिन जब निशिकांत दुबे ने छपी किताबें पेश की, तो कॉन्ग्रेस बौखला गई।
जहाँ हर बार की तरह बजट से पहले निर्मला सीतारमण की साड़ी लोगों तक पहुँच जाती है, और उस साड़ी के जरिए बुनकरों की मेहनत पहुँच जाती है। लेकिन रवीश कुमार इसे पचा नहीं पा रहे हैं।