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रेप हो रहा है तो लेटकर मजे लो, लड़कियों में दिमाग नहीं है क्या… क्यों हर बार पीड़िताओं को ही ‘गुनहगार’ बताते हैं कॉन्ग्रेस नेता?

अमरावती कांड में कॉन्ग्रेस की 'टुच्ची' सोच को पूरी तरह उजागर करते कॉन्ग्रेस नेत्री यशोमती चंद्रकांत ठाकुर का पीड़िताओं पर सवाल उठाते बयान सामने आया है। उन्होंने उन पीड़िताओं को लेक्चर दिया- "लड़कियों में अक्ल नहीं है क्या? क्या लड़कियों ने अपनी बुद्धि खो दी है?"

महाराष्ट्र में अमरावती जिले से सामने आया मामला समाज की कई परतों को उजागर करता है। एक तरफ जहाँ मुस्लिम युवक मोहम्मद अयान अहमद तनवीर ने 180 लड़कियों को अपने जाल में फँसाया, उनके साथ 350 से ज्यादा अश्लील वीडियो बनाए और इनमें से 100 वीडियो वायरल भी कर दिए। दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस है, जो ऐसे गंभीर मामलों में पीड़िताओं को कठघरे में खड़ा करने से बाज नहीं आती।

इस पूरे मामले में कॉन्ग्रेस की ‘टुच्ची’ सोच को पूरी तरह उजागर करते कॉन्ग्रेस नेत्री यशोमती चंद्रकांत ठाकुर का पीड़िताओं पर सवाल उठाते बयान सामने आया है। उन्होंने उन पीड़िताओं को लेक्चर दिया- “लड़कियों में अक्ल नहीं है क्या? क्या लड़कियों ने अपनी बुद्धि खो दी है?”

दिलचस्प बात यह है कि यशोमती ठाकुर 2019 से 2022 तक कॉन्ग्रेस और शिवसेना के गठबंधन वाली सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री रह चुकी हैं। यानी जिस पद पर रहते हुए यशोमती ठाकुर से महिलाओं को सुरक्षा और सम्मान की आस थी, वही कॉन्ग्रेस नेता आज पीड़ित लड़कियों पर सवाल उठा रही है।

सीधी बात है कि ये सिर्फ एक बयान नहीं है, ये कॉन्ग्रेस पार्टी की मानसिकता है। ये वही सोच है जो हर बार रेप, छेड़छाड़ या यौन शोषण के मामलों में अपराधी पर सवाल उठाने के बजाए लड़कियों को ही नसीहत देने लगती है। कभी उनके कपड़ों पर, कभी उनकी समझ पर, कभी उनके फैसलों पर। हर बार राजनीतिक बयानबाजी में निशाना पीड़िता ही बनती हैं।

और ये पहली बार नहीं हुआ है। कॉन्ग्रेस के नेताओं का ट्रैक रिकॉर्ड उठाकर देख लीजिए, ऐसे बयान बार-बार सामने आते हैं। कर्नाटक विधानसभा के तत्कालीन स्पीकर केआर रमेश कुमार का वो शर्मनाक बयान कौन भूल सकता है- “जब रेप होना ही है, तो लेटो और मजे लो।” यही नहीं कॉन्ग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया खुलेआम कहते हैं- “खूबसूरत लड़की दिख जाए तो दिमाग विचलित हो जाता है।” केरल कॉन्ग्रेस के नेता मुल्लापल्ली रामचंद्रन तो इससे भी आगे निकल जाते हैं और कहते हैं- “जिस लड़की का रेप हो, उसे आत्महत्या कर लेनी चाहिए।” वहीं अमरगौड़ा पाटिल जैसे नेता तो रेप पीड़िता के परिवार को ही झूठा करार देने लगते हैं।

ये कोई एक-दो फिसलती जुबान के उदाहरण नहीं हैं, ये उसी पुरानी, टुच्ची और गैर-जिम्मेदार सोच की झलक है जो अंदर तक बैठी हुई है।

और बात यहीं खत्म नहीं होती। जब राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी हाथरस की पीड़िता से मिलने जाते हैं, तब जो वीडियो सामने आई, उसने भी बहुत कुछ साफ कर दिया। जिस वक्त पूरे देश में गुस्सा और संवेदना का माहौल था, उस समय दोनों भाई-बहन का कार में हँसी-मजाक करते हुए जाना ये दिखाता है कि गंभीरता कितनी है। साफ है, ये सिर्फ अलग-अलग नेताओं की गलती नहीं है।

सबसे खतरनाक बात ये है कि इस तरह के बयान सीधे-सीधे अपराधियों को राहत देते हैं। जब देश की एक पार्टी के नेता ही पीड़ितों को दोष देने लगेंगे, तो अपराधियों का हौसला क्यों नहीं बढ़ेगा? उन्हें तो यही लगेगा कि गलती उनकी नहीं, बल्कि लड़कियों की ही है।

आखिर में साफ शब्दों में कहें तो कॉन्ग्रेस की समस्या बयान नहीं, पूरी सोच है। बार-बार वही गिरी हुई बातें, वही पीड़ितों को कठघरे में खड़ा करने की आदत ये दिखाती है कि ये कोई गलती नहीं बल्कि जड़ जमा चुकी मानसिकता है। जिस पार्टी के नेताओं को रेप जैसे गंभीर अपराध में भी संवेदनशीलता नहीं दिखती, वो महिलाओं की सुरक्षा की बात करें, ये खुद एक मजाक लगता है। सच यही है कि कॉन्ग्रेस के लिए ऐसे मुद्दे गंभीर नहीं, सिर्फ राजनीति का सामान है। और जब तक ये सोच नहीं बदलेगी, तब तक इनके बयान भी ऐसे ही जहरीले और शर्मनाक आते रहेंगे।

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पूजा राणा
पूजा राणाhttps://hindi.opindia.com/
एक मामूली लड़की! असलियत से वाकिफ होने की खोज में

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