हैदराबाद के प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) हत्याकांड को तेलंगाना पुलिस ने सुलझा लेने का दावा किया है। उनके मुताबिक गिरफ्तार आरोपित मोहम्मद पाशा और अन्य तीन बहुत दिन से प्रीति के साथ बलात्कार करने की योजना बना रहे थे और टोल प्लाजा पर खड़ी पीड़िता की स्कूटी को भी उन्होंने जानबूझकर पंचर किया था।
प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) की स्कूटी पंक्चर होती है... मदद के लिए कुछ लोग आते हैं... बहन को फोन करती है... थोड़ी देर में फोन स्विच ऑफ हो जाता है... अगले दिन आधी जली लाश मिलती है... लाश से 100 मीटर की दूरी पर अंडरवियर मिलता है... इन सारे बिंदुओं का कनेक्शन ढूँढने पर...
दहेज के लिए आरोपितों ने पहले पीड़िता को जमकर पीटा। फिर 22 नवंबर की सुबह पति ने उसे तीन तलाक दे दिया और उसी रात ससुर ने अपने साथी के साथ मिल उसकी अस्मत लूट ली।
अरबाज ने पीड़िता को पहले प्रेमजाल में फॅंसाया। शादी का झॉंसा देकर वह पॉंच महीने से उसका यौन शोषण कर रहा था। 5 दिन पहले पीड़िता को मिलने के लिए बुलाया और फिर दोस्तों के संग मिलकर उसकी अस्मत लूट ली।
लड़की का आरोप है कि आसिफ ने शादी का झाँसा दे उसके साथ संबंध बनाए। जब वह गर्भवती हो गई तो उसने उसका गर्भपात करवा दिया। इसके बाद से ही उसने आसिफ से दूरी बनानी शुरू कर दी। लेकिन...
घटना के अगले ही दिन पीड़िता अपनी शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुँची थी मगर पुलिस ने कोई मामला दर्ज नहीं किया। 12 दिन बीत जाने पर पीड़िता ने एक बार फिर से पुलिस से गुहार लगाई तब जाकर कहीं पुलिस ने उसकी शिकायत दर्ज की।
आरोपित डीपीएस राठौड़ और स्थानीय नेता अजीत सिंह सबूत के बदले चिन्मयानन्द से सवा करोड़ रुपये माँग रहे थे। इस मामले में यूपी पुलिस की एसआईटी ने आरोपितों पर आईपीसी की धारा 385(रंगदारी) , 506 (धमकी देने) और 201 (सबूत नष्ट करने) के तहत केस दर्ज कर लिया है।
चारों मुजरिमों द्वारा किसी तरह की याचिका दायर न करवाने के बाद अब तिहाड़
जेल प्रशासन इस तथ्य को ट्रायल कोर्ट के समक्ष रखेगा। उसके बाद ट्रायल कोर्ट कानूनन कभी भी मुजरिमों का डेथ-वारंट जारी कर सकता है।
"पुलिस ने मामले की जाँच ठीक से नहीं की और आरोपितों को वामपंथी सरकार का समर्थन प्राप्त है, क्योंकि वे स्थानीय स्तर पर वामपंथी दलों के लिए काम करते थे। और इसी वजह से वो छूट गए।"