जस्टिस आर बानुमति और जस्टिस ए. एस. बोपन्ना ने करीब 5 घंटे तक छात्रा का इंतजार किया। पहली सुनवाई दिन में 1.15 मिनट पर हुई, जब पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से लड़की की लोकेशन माँगी और पूछा कि कितने समय में उसे सुप्रीम कोर्ट लाया जा सकता है?
उन्नाव रेप पीड़िता के चाचा पर 6 केस चल रहे हैं। शुक्रवार को अलग-अलग न्यायालयों में पाँच मामलो की सुनवाई हुई थी। इस दौरान कड़ी सुरक्षा के बीच दिल्ली पुलिस की गाड़ी में पीड़िता के चाचा को तिहाड़ जेल से उन्नाव लाया गया था।
यौन शोषण के ज्यादातर मामले मौलवियों के खौफ में दबा दिए जाते हैं। जो मामले सामने आते हैं उनमें भी पीड़िताओं के साथ नुसरत जैसी घटना अंजाम दी जाती है। आखिर क्यों कभी धर्म तो कभी तुष्टिकरण के नाम पर आरोपी मौलवियों के कुकर्म धुल जाते हैं?
गवाह ने कहा उसे रेप पीड़िता और गायत्री प्रजापति से जान का खतरा है। उसे लगातार जान से मारने की कोशिश की जा रही हैं। लखनऊ की एक गाड़ी हमेशा उसके पीछे लगी रहती है, जिस कारण वह घर से बाहर भी नहीं निकल पाती।
फर्जी नारीवाद को दो पल के लिए कोने में रखकर एक बार इस पर गौर कीजिए कि हम कथित तौर पर महिला सुरक्षा और महिला अधिकारों के नाम पर क्या गंदगी फैला रहे हैं। हम अभिव्यक्ति की आजादी का प्रयोग कौन सी दिशा में कर रहे हैं? पूछिए एक बार खुद से क्या वाकई प्रेम में अलग होने के बाद आपसी संबंध बलात्कार हो जाते हैं?
सुप्रीम कोर्ट की दो जजों वाली बेंच ने कहा कि वादा करना और किन्हीं परिस्थितियों में उसे नहीं निभा पाना वादा कर धोखा देना नहीं है। कोर्ट ने कहा, " झूठे वादे कर महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाने में और आपसी सहमति से शारीरिक संबंध बनाने में फर्क है।
जब कासिम जहाँगीर बन्दूक दिखाकर बलात्कार करता था, उसी वक़्त जहाँगीर की पत्नी किरण वीडियो बनाती रहती थी। इसके बाद पीड़िता को वीडियो और तस्वीरों के नाम पर ब्लैकमेल किया जाता था।
हादसे के बाद पीड़िता के चाचा महेश सिंह ने एक्सीडेंट के मामले में बीजेपी से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर समेत अन्य के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कराया था। दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को सेंगर के ख़िलाफ़ रेप के मामले में आरोप तय किए थे।
19 जून की देर रात बच्ची के साथ बलात्कार और फिर उसकी हत्या। 24 जुलाई को कोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू हुई। मात्र 6 कामकाजी दिनों (छुट्टियों को छोड़कर) के भीतर गवाहों गवाही ली गई। 8 अगस्त 2019 को दोषी को मौत की सजा सुनाई गई।
रिंकू शुक्ला के मुताबिक़, "यह मेरी आदत है। मैंने उन्हें (पुलिसकर्मी) चाय पीने के लिए पैसे दिए होंगे क्योंकि वह वहाँ खड़ा था। मेरा इरादा उन्हें रिश्वत देने का नहीं था। मैं 10-15 दिन पहले जेल के अंदर सेंगर से मिल चुका हूँ।"