जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटने के बाद सर्वोच्च न्यायालय में 14 याचिकाएँ दायर हुई हैं। जिसमें एडवोकेट एमएल शर्मा, पूर्व आईएस अधिकारी शाह फैसल, जेएनयू की पूर्व छात्रा शेहला रशीद और राधा कुमार की याचिका भी शामिल है।
यह मामला रोहिणी सिंह द्वारा 'द वायर' में लिखे गए एक लेख से सम्बंधित है, जिसमें जय शाह के व्यापार को लेकर उन पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। जय शाह ने 'The Wire' के ख़िलाफ़ 100 करोड़ रुपए का मानहानि का मुक़दमा दायर किया था।
जस्टिस भानुमति की पीठ ने कहा कि राहत पाने के लिए चिदंबरम को निचली अदालत में जाना होगा। दिल्ली हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज होने के बाद 21 अगस्त को सीबीआई ने चिदंबरम को गिरफ्तार कर लिया था। ईडी ने भी चिदंबरम के रिमांड की माँग की है।
कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन की याचिका में हस्तक्षेप की मॉंग। 16 अगस्त को CJI की अगुवाई वाली पीठ ने भसीन की याचिका पर सुनवाई को दो हफ्ते के लिए टाल दिया था और कहा था कि सरकार को सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए और समय दिया जाना चाहिए।
अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि जबकि हाई कोर्ट में मुकदमा INX मीडिया का चल रहा था, लेकिन उच्च न्यायालय के जज ने उससे किसी भी तरह से नहीं जुड़े मामले एयरसेल मैक्सिस का उल्लेख ज़मानत याचिका ख़ारिज करते हुए किया।
सभी 20 एफिडेविट से यह स्पष्ट है कि मुस्लिमों ने यह स्वीकार किया है कि 1935 के बाद से ही उस स्थल पर नमाज़ नहीं पढ़ी जा रही है और इसीलिए अगर हिन्दुओं को यह ज़मीन वापस कर दी जाती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट की दो जजों वाली बेंच ने कहा कि वादा करना और किन्हीं परिस्थितियों में उसे नहीं निभा पाना वादा कर धोखा देना नहीं है। कोर्ट ने कहा, " झूठे वादे कर महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाने में और आपसी सहमति से शारीरिक संबंध बनाने में फर्क है।
कश्मीरी पंडितों के संगठन का मानना है कि मुस्लिम बहुल राज्य को मिले विशेष प्रावधान का जम्मू-कश्मीर को इस्लामिक स्टेट बनाने के लिए दुरुपयोग किया जा रहा था। ये अनुच्छेद पंडितों की कश्मीर में वापसी में भी बाधक थे।
रामलला के वकील ने अदालत से कहा कि थोड़ी देर के लिए मान भी लिया जाए कि वहाँ कोई मंदिर, कोई देवता नहीं थे, फिर भी लोगों का विश्वास है कि श्रीराम का जन्म वहीं हुआ था। ऐसे में वहाँ पर मूर्ति रखना उस स्थान को पवित्रता प्रदान करता है।
चिदंबरम के वकील वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि जब तक अंतरिम जमानत पर सुनवाई ना हो जाए तब तक उनको गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए। इसके बाद जस्टिस रमन्ना की पीठ ने सीजेआई को मामला भेज दिया।