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विशाल डडलानी और तहसीन पूनावाला को सुप्रीम कोर्ट से राहत, जैन मुनि का उड़ाया था मजाक

अगस्त 2016 में हरियाणा पुलिस ने दोनों के ख़िलाफ़ धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करने के अपराध में आईपीसी की धारा 295-A, 153-A और 509 के तहत अंबाला छावनी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था।

जैन मुनि का मजाक उड़ाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है। हाई कोर्ट ने संगीतकार व आम आदमी पार्टी के समर्थक विशाल डडलानी और रॉबर्ट वाड्रा के रिश्तेदार तहसीन पूनावाला को जैन समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था।

हाई कोर्ट ने 1 मई, 2019 को दोनों के खिलाफ हरियाणा पुलिस के FIR को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि उन्होंने कोई आपराधिक अपराध नहीं किया था।

ख़बर के अनुसार, अगस्त 2016 में, हरियाणा पुलिस ने दोनों के ख़िलाफ़ धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करने के अपराध में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 295-A, 153-A और 509 के तहत अंबाला छावनी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था।

अगस्त 2016 में डडलानी ने हरियाणा विधानसभा को संबोधित करते हुए कुछ नग्न साधु के ‘कोलोस्डल आइडियल’ पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की थी। जैन समुदाय के लोग उनके इस ट्वीट पर आक्रोशित हो गए। स्थिति को क़ाबू में करने के लिए AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल और दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को माफ़ी तक माँगनी पड़ी थी। इस बीच, कॉन्ग्रेस समर्थक और रॉबर्ट वाड्रा के रिश्तेदार तहसीन पूनावाला ने भी जैन भिक्षु पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।

तरुण सागर का बीते साल निधन हो गया था। वे दिगंबर समुदाय के जैन भिक्षु थे। ऐसे भिक्षु कपड़े नहीं पहनते हैं। बाद में डडलानी ने भी माफ़ी माँग ली थी। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से जैन साधु से मुलाक़ात कर माफ़ी माँगी थी। वहीं, पूनावाला ने अपने ट्वीट पर कोई अफ़सोस न जताते हुए तर्क दिया कि उन्होंने कोई आपराधिक अपराध नहीं किया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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