यदि पीएम मोदी के सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नजर डालें तो फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम प्लेटफार्म्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फॉलोवर्स की संख्या 11,09,12,648 है।
इस लिस्ट में कामरेड कन्हैया कुमार के समर्थक युवा नेता जिग्नेश मेवानी से लेकर कॉन्ग्रेस नेता दिव्या स्पंदना और अन्य कई नाम मौजूद हैं, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को किसी काल्पनिक और मनोवैज्ञानिक घृणा के कारण बेहद भद्दी बातें कही गई हैं
तेज बहादुर यादव का नया वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वह दारू पीते हुए दिख रहे हैं। लोगों का कहना है कि तेज बहुर इसमें अपने परिचितों संग दारू पी रहे हैं। इस वीडियो के बारे में पूछने पर हाँ-ना, हाँ-ना करने के बजाय तेज बहादुर ने पत्रकारों को बताया कि...
PM मोदी ने जनसभा को सम्बोधित करते हुए सेरामपुर की जनता से भाजपा के पक्ष में मतदान करने की अपील की। लेकिन, इन सब से ज्यादा चर्चा का विषय देबजीत सरकार द्वारा इस जनसभा के बाद की तस्वीरें बन गई हैं।
'वीरे दी वेडिंग' फिल्म में खुलकर अपने 'मन की बात' करने वाली स्वरा भास्कर को बहुत आसानी से नारीवाद का चेहरा बना कर पेश किया जाने लगा है। यह वर्तमान समय का सबसे बड़ा दुर्भाग्य ही कहा जा सकता है कि महिलाओं के अधिकारों को उसके शारीरिक सुख और जबरन फूहड़पन मात्र से जोड़कर पेश कर देने से वो समाज में महिलाओं की नई पहचान दिलाने वाले ठहराए जाने लगते हैं।
इसके अलावा, अजय शुक्ला ने अपने ब्लॉग में भी लिखा था कि भारतीय वायु सेना ने इन वाहियात अटकलों पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया था, यह कहते हुए कि पूछताछ अभी भी जारी है और किसी निष्कर्ष पर पहुँचने के लिए कोर्ट ऑफ़ एन्क्वायरी को समय लगता है।
भले ही यह बात रघुराम राजन ने एक मज़ाकिया लहज़े में कही, लेकिन इस बात से यह तो स्पष्ट हो गया कि वो फ़िलहाल तो राजनीति में अपने क़दम नहीं रखने वाले हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वो जहाँ हैं वहीं ख़ुश हैं, लेकिन भविष्य में अगर उन्हें कोई योग्य ऑफ़र मिला तो वो उस पर विचार ज़रूर करेंगे।
वफ़ादार मीडिया को उम्मीद थी कि प्रियंका गाँधी वाड्रा उनकी रक्षक होंगी। और इसीलिए उन्होंने भाई-बहन की जोड़ी को मसीहा के रूप में प्रचारित करने की पूरी कोशिश की, लेकिन उन्हें यह एहसास हो चला है कि वो अब तक किसी हारने वाले घोड़े पर ही दाँव लगाते रहे।
Faking News के लेख में जातिगत नजरिया तलाश कर 'दी लल्लनटॉप' ने इसे फ़ौरन लपक लिया और इसके सम्पादक ने आम चुनावों के बीच में इस खबर को प्रकाशित करने का निर्णय लिया। इंडिया टुडे समूह के इस समाचार वेबसाइट ने अपने पाठकों को मारक मजा देने की मम्मी कसम खाई है। हो सकता है, इसी कारण अपने दैनिक ‘कट्टर पाठकों’ की सोचने की क्षमता को भाँपते हुए ही उन्होंने इस रिपोर्ट समझाने का एक प्रयास किया हो।