"दानिश और उसके तीन अन्य दोस्तों ने रेप करने में नाकाम रहने के बाद रिया और आसिफ दोनों को गोली मार दी। दानिश ने आसिफ को फोन कर मिलने के लिए बुलया था। आसिफ और रिया साथ-साथ गए थे। वहॉं दानिश और उसके तीन अन्य दोस्तों ने फब्तियाँ कसी और रिया के साथ जबर्दस्ती करने की कोशिश की।"
नमृता के भाई विशाल ने बताया, "यह आत्महत्या नहीं है। आत्महत्या के निशान अलग होते हैं। मुझे उसकी गर्दन के चारों ओर केबल के निशान मिले। उसके हाथ पर भी निशान थे। उसकी दोस्तों ने बताया था कि उसने नमृता के गले पर दुपट्टा बँधा हुआ देखा था।"
पुलिस ने आसिफ़ के दोस्त दानिश को हिरासत में ले लिया है। कथित तौर पर उसने आसिफ़ को पिस्तौल दी थी। दानिश के पास से दो राउंड गोली और मृतक का मोबाइल बरामद हुआ है। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि आत्महत्या का संभावित कारण असफल प्रेम संबंध हो सकता है। फ़िलहाल, मामले की जाँच जारी है।
नमृता के भाई विशाल जो कि खुद मेडिकल कंसलटेंट हैं का कहना है कि उसकी हत्या की गई है। विशाल ने कहा, मैंने नमृता की गर्दन पर तार के निशान देखे हैं। ऐसे ही निशान उसके हाथ पर थे। लेकिन उसकी दोस्त का कहना है कि नमृता के गले में दुपट्टा बॅंधा था।
मणिवन्नन ने भाजपा नेता चिनाराज के घर में घुस कर उन्हें चाकू से मार डाला। भाजपा नेता की मौके पर ही मौत हो गई। आरोपित मणिवन्नन भाग खड़ा हुआ, लेकिन पुलिस ने उसे गिरफ़्तार कर लिया। उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया है।
बहन के मृत शरीर को देख नमृता के भाई डॉ विशाल सुंदर ने कहा, "उसके शरीर के अन्य हिस्सों पर भी निशान हैं, जैसे कोई व्यक्ति उन्हें पकड़ रखा था। हम अल्पसंख्यक हैं, कृपया हमारे लिए खड़े हों।"
कमरुद्दीन की गुरुवार शाम आरोपितों के साथ बहस हुई थी। उनलोगों ने उसे मारने की धमकी दी। बाद में उसे सलामताबाद जोहर मस्जिद के पास कल्लू स्टेडियम रोड पर पकड़ लिया और धारदार हथियार से वार किए। सीसीटीवी फुटेज से पुलिस आरोपितों को पकड़ने में सफल रही।
सोमवार की सुबह करीब साढ़े 4 बजे शंकर को एहसास हुआ कि रघुवीर अभी भी अपने फोन पर पबजी खेल रहा है। वे उसके कमरे में गए और फोन छीन लिया। इसके बाद रघुवीर अपने पिता पर झपटा और हसियां से हमला कर उनके टुकड़े कर दिए।
वीरेंदर उर्फ़ काले को मार गिराने की इस वारदात में 10 से अधिक अपराधी शामिल थे। हत्या करने के बाद सभी अपराधी भाग निकले। हमलावरों का सुराग पाने के लिए पुलिस सीसीटीवी कैमरों को खँगाल रही है।
घर-घर अखबार पहुँचा कर अपनी रोजी-रोटी चलाने वाले मन्नूलाल वैष्णव को यह नहीं पता था कि एक दिन इन्हीं अखबारों में उनकी हत्या की खबर छपेगी! हत्या वो भी उस रफीक खान (इंसान या हैवान!) के द्वारा जो इन्हीं के लाए अखबारों को पढ़ता जरूर था लेकिन पैसे देने के नाम पर नजरें चढ़ाता था।