प्रत्येक सुबह वामदेव अपने शिष्य को एक हस्तलिखित पर्ची देते थे। उस पर्ची को रोज़ अलग-अलग संतों के पास लेकर जाना होता था। उसमें अमित शाह के लिए सिफ़ारिश होती थी। इस तरह अमित शाह रोज़ किसी न किसी नए संत के साथ समय व्यतीत करते थे, भंडारे में खाते और दक्षिणा इकट्ठा किया करते थे।