गृह मंत्रालय ने हर राज्य को जिला स्तर पर पर्याप्त डिटेंशन सेंटर स्थापित करने का आदेश दिया गया है, जहाँ संदिग्ध प्रवासियों को निर्वासन की प्रक्रिया पूरी होने तक रखा जाएगा।
पूछताछ के दौरान सबसे मुख्य प्रश्न यह था कि आवास पर मिली नकदी को जब्त क्यों नहीं किया गया और घटना के तुरंत बाद पहुँचे पुलिसकर्मियों के फोन से वीडियो क्यों डिलीट किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि कई अन्य राज्यों ने पहले ही अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में चिकित्सा और इंजीनियरिंग शिक्षा प्रदान करना शुरू कर दिया है। तमिल भाषा में भी इसकी शुरुआत होनी चाहिए।