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मोदी सरकार के प्रहार से खौफ में वामपंथी आतंकी, हथियार डालकर शांति वार्ता के लिए लिखा पत्र: शाह ने मार्च 2026 तय की है नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन, 2025 में अब तक 200+ ढेर

अमित शाह ने मार्च 2025 तक देश को नक्सलवाद मुक्त बनाने का ऐलान किया था, उसके बाद से ही CPI या तो सरेंडर कर रहा है या फिर उसके संगठन के बड़े नेता मारे जा रहे हैं। CPI संगठन ने सरकार को पत्र लिखकर कहा है कि वो संघर्ष को 1 महीने के लिए रोक रहा है और शांति वार्ता के लिए तैयार है।

नक्सली संगठन CPI (माओवादी) ने पहली बार सरकार से शांति वार्ता करने और हथियार डालने की पेशकश की है। संगठन ने एक प्रेस नोट जारी कर कहा है कि वो फिलहाल एक महीने के लिए अस्थायी तौर पर संघर्ष रोककर सरकार से बातचीत के लिए तैयार हैं।

यह कदम तब उठाया गया है, जब गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को खत्म करने का लक्ष्य रखा है। पिछले कुछ महीनों में सुरक्षाबलों की कड़ी कार्रवाई से नक्सलियों को बड़ा नुकसान हुआ है, जिससे वे बातचीत के लिए मजबूर हुए हैं।

नक्सलियों के पत्र में क्या लिखा है?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नक्सली संगठन के प्रवक्ता ‘अभय’ ने 15 अगस्त 2025 को जारी एक प्रेस नोट में कहा कि वो फिलहाल के लिए हथियारबंद संघर्ष को रोकना चाहते हैं और शांति वार्ता के लिए तैयार हैं। अभय ने अपने पत्र में लिखा कि बीते महीनों में लगातार मुठभेड़ों में उसके कई बड़े नेता मारे गए हैं। बसवराजू जैसे शीर्ष नेता समेत केंद्रीय कमेटी के 7 सदस्य इस साल मारे गए। अब संगठन शांति चाहता है।

नक्सली संगठन का सरकार को पत्र, लिखा- हथियार डालकर शांति वार्ता को तैयार

पत्र में यह भी कहा गया है कि वे सरकार से बातचीत करने के लिए एक महीने का समय चाहता हैं ताकि वो अपने देश भर के नेताओं और कार्यकर्ताओं, खासकर जेल में बंद साथियों से इस बारे में सलाह-मशविरा कर सकें। नक्सलियों ने कहा कि अगर सरकार चाहे तो वे वीडियो कॉल पर भी बात करने के लिए तैयार हैं।

पत्र में यह भी लिखा है कि भविष्य में वे राजनीतिक पार्टियों और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर लोगों के हक के लिए लड़ेंगे। हालाँकि, छत्तीसगढ़ पुलिस इस पत्र की सच्चाई की जाँच कर रही है और कहा है कि बातचीत पर कोई भी फैसला सरकार ही लेगी।

अमित शाह की डेडलाइन और 2024-25 तक मारे गए नक्सलियों की संख्या

गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने का ऐलान किया था। अमित शाह ने कहा था कि अब समय आ गया है कि इस समस्या पर आखिरी प्रहार किया जाए। इसके बाद से ही सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन तेज कर दिया है।

साल 2024 और 2025 में नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई में काफी तेजी आई है। इस दौरान सुरक्षाबलों ने बड़ी संख्या में नक्सलियों को मार गिराया है, जबकि कई ने डर से आत्मसमर्पण कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2024 में 290 नक्सलियों को मार गिराया गया। इसके अलावा, 1090 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया और 881 ने आत्मसमर्पण किया।

इस साल, सुरक्षाबलों ने 200 से ज्यादा नक्सलियों को मार गिराया है, जिनमें कई बड़े नाम भी शामिल हैं। वहीं 104 को गिरफ्तार किया गया है और 164 ने आत्मसमर्पण किया है। हाल ही में, 21 मई 2025 को 27 नक्सली मारे गए थे, जिसमें 1.5 करोड़ का इनामी बसवा राजू भी था।

इससे पहले भी कई बड़े ऑपरेशन हुए, जिनमें कई टॉप नक्सली नेताओं का खात्मा हुआ। माना जा रहा है कि इन लगातार हो रही कार्रवाईयों ने ही नक्सलियों को हथियार डालने के लिए मजबूर किया है।

पिछले 15 महीनों में, कुल मिलाकर 400 से ज़्यादा नक्सली मारे गए हैं, जिनमें कई बड़े कमांडर भी शामिल हैं। गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में चलाई जा रही ‘जीरो टॉलरेंस‘ नीति के कारण इन ऑपरेशनों को बड़ी सफलता मिली है।

नक्सली हिंसा में कमी

सरकार की कड़ी कार्रवाई के कारण नक्सली हिंसा में भी कमी आई है। 2004 से 2014 के बीच जहाँ 16,463 हिंसक घटनाएँ हुई थीं। वहीं, मोदी सरकार आने के बाद 2014 से 2024 के बीच यह संख्या 53% घटकर 7,744 रह गई।

इसी दौरान सुरक्षाबलों की मौत में 73% और नागरिकों की मौत में 70% की कमी आई है। 2014 में जहाँ 126 जिले नक्सल प्रभावित थे, 2024 में यह संख्या घटकर केवल 12 रह गई है।

सरकार की शर्त

छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने पहले ही साफ कर दिया था कि सरकार किसी भी तरह की बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन उसकी कोई शर्त नहीं होनी चाहिए। विजय शर्मा ने कहा था कि अगर नक्सली मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं तो उन्हें भारतीय संविधान को मानना होगा, क्योंकि बिना संविधान को माने कोई भी बातचीत बेमतलब होगी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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