'घूसखोर पंडत' नाम कोई मासूम क्रिएटिविटी नहीं है, यह वही प्रोपेगेंडा है जो बॉलीवुड और नेटफ्लिक्स सालों से इस्तेमाल करते आए हैं, जहाँ पंडित और ब्राह्मण पहचान 'सेफ टारगेट' मानी जाती है।
काम नहीं मिलता तो स्वरा भास्कर की तरह ही एआर रहमान ने भी विक्टिम कार्ड खेलना सीख लिया है। वे भी 'पावर शिफ्ट' और इंडस्ट्री को 'कम्युनल' बताकर चर्चा में आना चाहते हैं।
कव्वाली 'न तो कारवाँ की तलाश है, न तो हमसफर की तलाश है' का सबसे प्रसिद्ध और प्रामाणिक पहली फिल्मी रिकॉर्डिंग 1960 की हिंदी फिल्म 'बरसात की रात' से मिलती है।