गहलोत सरकार ने अब 100 हिंदू शरणार्थियों को रियायती दर पर जमीन देने का ऐलान किया है। इससे पहले उसने हिंदू शरणार्थियों को पाकिस्तान चले जाने को कहा था। हालॉंकि उसके इस आदेश पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रोक लगा दी थी।
राजस्थान के पंचायती चुनाव में एक नया इतिहास रच दिया गया है। ऐसा पहली बार हुआ है, जब पाकिस्तान मूल की रहने वाली कोई महिला सरपंच बनी हो। पाकिस्तान के सिंध से भारत लौटीं नीता कँवर ने सरपंच का चुनाव जीत लिया है।
"कोलकाता की सड़कों पर बुद्धिजीवियों नामक कुछ जीव बाहर आ गए हैं। ये चाटूकार बुद्धिजीवी, जो दूसरे की जेब पर निर्भर करते हैं और उनके पैसों का लाभ उठाते हैं, जब बांग्लादेश में उनके पूर्ववर्तियों को यातनाएँ दी गई थीं, तब वे कहाँ थे?"
"वहाँ की भीड़ ने मुझे घेर लिया और बोला कि कौन से चैनल से हो? मैंने कहा कि मैं बस एक स्टूडेंट हूँ और मैं आपकी आवाज जनता तक पहुँचाने के लिए आई हूँ। उन्होंने कहा कि जब तक वीडियो डिलीट नहीं करोगी, जाने नहीं देंगे। उस समय मुझे वाकई ऐसा लगा कि आज मेरी जान चली जाएगी, मैं घर पर जिंदा नहीं पहुँच पाऊँगी।”
आंदोलनकारी छात्रों के धरने में अचानक से एएमयू कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर पहुँच गए। उन्होंने जाते ही छात्रों को सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक पोस्ट से सम्बन्धित कागज को दिखाते हुए नाराजगी जताई, जिसके जवाब में छात्रों ने कहा कि वायरल हो रही खबर के कारण हम 32 हजार छात्रों को कटघरें में खड़ा नहीं कर सकते।
यह उस आज़ादी की माँग है। जिसकी एक झलक पिछले दिनों जामिया और जेएनयू में प्रदर्शनकारियों के हाथों में पकड़े पोस्टरों में दिखाई दी थी। इस आज़ादी की माँग को उन शिक्षकों ने दोहराया है, जिनके ऊपर विश्वविद्यालय के छात्रों को उज्ज्वल भविष्य की राह दिखाने की ज़िम्मेदारी है।
"हम तुम्हें असली तस्वीर दिखाएँगे। इंशाल्लाह। हिंदुस्तान के झंडे तिरंगे में मौजूद तीन अलग-अलग रंग हैं। जो देश में अलग-अलग धर्मों (हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई) को दर्शाता है। उसमें से ये लोग मुस्लिम को निकालने के चक्कर में हैं। लेकिन, जरा अमित शाह, मोदी, योगी नीचे झाँक कर देखें....."
इन वीडियो में 'लिबरल्स' की भीड़ बच्चों को कन्धों पर बिठाकर जो नारे लगवा रही है, वो स्पष्ट करता है कि इस सारे हंगामे का कारण कोई कानून नहीं बल्कि कुछ चुनिंदा लोगों का सत्ता में होना। वीडियो में बच्चा नारे लगाते हुए कहता है- 'हम ले के रहेंगे आज़ादी, तेरा बाप भी देगा आज़ादी, तेरी माँ भी देगी आज़ादी।"
दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को चंद्रशेखर सशर्त जमानत दी थी। अदालत ने कहा था कि वह चार हफ्तों तक दिल्ली नहीं आ सकेंगे और चुनावों तक धरना-प्रदर्शन से दूर रहेंगे।
"कई डॉक्टरों ने अराजक तत्वों के इस गिरोह के हमले का सामना किया है। ये लोग 'जिहादी' हैं। राष्ट्रीय मुद्दों पर आतंकवादियों के समर्थन करते हैं। इन्हें अफ़ज़ल गुरु, इशरत जहाँ का समर्थन करते और भारतीय सेना को गाली देते देखा-सुना जा सकता है।"