एनपीआर को लेकर भी लोगों में भ्रम न फैलाया जाए। उसे मद्देनजर रखते हुए ANI को दिए इंटरव्यू में केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने, एनपीआर, एनआरसी, सीएए और डिटेंशन सेंटर जैसे मुद्दों पर खुलकर जवाब दिया।
मेरठ में सीएए को लेकर हुई हिंसा में मोहसिन, आसिफ, जहीर, आलिम और दिल्ली के आसिफ की मौत हो गई थी। इसमें 35 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं, जिनका विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। इस मामले में अब तक 102 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है।
वरुण ग्रोवर भले ही सरकार को कागज़ न दिखाने की बात करते हों और दूसरों को भी ऐसा ही सलाह देते हों लेकिन उनके शो में जाने वाले लोगों को कागज़ दिखाना ही पड़ेगा। सोशल मीडिया में लोगों ने वरुण ग्रोवर के इस दोहरे रवैये को आड़े हाथों लिया।
वीडियो में देखा जा सकता है कि दंगाई बाइकों पर पेट्रोल डाल कर उन्हें आग के हवाले कर रहे हैं। ये वीडियो फुटेज 15 दिसंबर के हैं। दंगाइयों को वीडियो में पत्थरबाजी करते हुए भी देखा जा सकता है।
31 वर्षीय वरुण पर सीएए के विरोधियों ने धारदार हथियार से हमला किया। हमला काफ़ी क्रूर तरीके से किया गया। उनके सिर में गहरी चोट आई है। बेंगलुरु साउथ के सांसद व युवा भाजपा नेता तेजस्वी सूर्या ने हॉस्पिटल में जाकर उनका हालचाल जाना।
"कई लोग ऐसी अफवाहें फैला रहे हैं कि मुस्लिमों को हिंदुस्ताान से बाहर भेजा जा रहा है। हमें यह समझने की ज़रूरत है कि इस कानून में नागरिकता देने की बात हो रही है, लेने की नहीं।"
"उपद्रवियों में दो तरह के लोग हैं। एक वो जिनकी राजनीति दशकों तक झूठ फैलाने पर ही टिकी हुई है। दूसरे वो लोग जो समझते थे कि वो ही सरकार हैं और वो जो इतिहास बताएँगे, वही सच माना जाएगा। ख़ुद को भारत भाग्य विधाता मानने वालों ने अब बाँटो और राज़ करो वाली नीति पर काम करना शुरू कर दिया है।"
"अगर आपको मोदी पसंद नहीं है तो मोदी को गाली दो, मोदी का पुतला जलाओ, जूते मारो लेकिन देश की सम्पत्ति मत जलाओ। मेरे दोबारा जीत कर आने के बाद का सदमा कुछ लोग अभी भी सहन नहीं कर पा रहे और देश में तूफ़ान खड़ा करने के लिए..."
जैसे ही पीएम मोदी ने कहा कि दलितों और शोषितों के लिए नागरिकता संशोधन क़ानून लाया गया है, वैसे ही लोगों ने खड़े होकर 'जय श्री राम' का नारा लगा कर सीएए का स्वागत किया। पूरा रामलीला मैदान 'जय श्री राम' के नारों से गूँज उठा।
उपद्रवियों ने पटना के एक मंदिर में तोड़-फोड़ और आगजनी की। क्यों? क्योंकि यह उग्र भीड़ मंदिर के पास से गुजर रही थी। स्थानीय निवासियों और पुलिस ने इन्हें आगे बढ़ने से मना किया। बस, इतनी सी बात पर उपद्रवियों ने मंदिर में तोड़-फोड़ करनी शुरू कर दी, फिर आगजनी भी की।