चीनी प्रशासन गर्भपात को मुस्लिमों के ख़िलाफ़ एक हथियार की तरह इस्तेमाल करता है। उनकी मुस्लिम होने की पहचान को समय से पहले ही मिटाया जा रहा है। उनके बच्चों को पैदा होने से पहले ही मारा जा रहा है।
हॉस्टल की पहली कक्षा में एक बच्ची है। उसके क्लास के दोस्त उसे बहुत प्यार करते हैं और वह पढ़ने-लिखने में भी अच्छी है, लेकिन वह अकेले में रोया करती है। दरअसल, वह अपनी माँ के पास जाना चाहती है, जिसे चीन में एक डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। लेकिन...
"नए संस्करण में ऐसी कोई भी बात नहीं होनी चाहिए जो कि कम्युनिस्ट पार्टी के विश्वासों के ख़िलाफ़ जाती हो। जो भी पैराग्राफ ग़लत समझे जाएँगे, उनमें या तो बदलाव किया जाएगा या फिर उनका फिर से अनुवाद करवाया जाएगा।"
ऐसे समय में जब विश्व के लगभग सभी देशों ने पाकिस्तान का साथ छोड़ दिया है। उस समय चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा साझेदार है और शाहिद अफरीदी का चीन के खिलाफ़ बोलना और प्रधानमंत्री इमरान खान को इस मुद्दे पर बोलने के लिए उकसाना उन्हें महंगा पड़ सकता है।
बड़े पैमाने पर हो रहे ह्यूमन ट्रैफिकिंग की जानकारी पाकिस्तान की सेना और सरकार दोनों को है। लेकिन, चीन को खुश रखने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। पुलिस पर ऐसे मामलों की जॉंच नहीं करने का दबाव है। मीडिया को भी इसकी रिपोर्टिंग से मनाही है।
शी जिनपिंग का मानना है कि इस्लामिक कट्टरता के आगोश में आते ही व्यक्ति होश खो बैठता है। चाहे वह स्त्री हो या पुरुष। ऐसे लोग पलक झपकते किसी की हत्या कर सकते हैं। शी के अनुसार विकास इस समस्या का समाधान नहीं है।
1 मिनट 45 सेकंड के इस वीडियो को वॉर ऑन फियर नाम के यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया है। कई सौ की तादाद में कैसे बंदी बनाकर, उनकी आँखों पर पट्टी चढ़ाकर ट्रेन से शियानजिंग में स्थांतरित किया जा रहा है।
चीन के मुस्लिम क्षेत्र शिनजियांग के लिए आजादी की माँग करने वाले वॉशिंगटन स्थित समूह ‘द ईस्ट तुर्किस्तान नेशनल अवेकनिंग मूवमेंट’ ने 182 संदिग्ध ‘‘हिरासत शिविरों’’ के बारे में संकेत दिए हैं, जहाँ उइगरों पर उनकी संस्कृति छोड़ने के लिए कथित तौर पर दबाव बनाया जाता है।
चीनी सेना ने लिपुलेख पास के बेहद करीब सैन्य सुविधाओं और आधारभूत ढाँचे का निर्माण किया है। इसमें एक हेलीपैड, एक सोलर पैनल और एक लॉन्ग रेंज रेकनाइसेन्स एंड ऑब्ज़र्वेशन सिस्टम (लोर्रस) शामिल है।