इस फैसले से जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री, फारूक अब्दुल्ला, उनके बेटे उमर अब्दुल्ला, गुलाम नबी आजाद और महबूबा मुफ्ती इस फैसले से प्रभावित होंगे।
हम कह सकते हैं कि इस्लामीकरण करके घाटी में जो कट्टरपंथ फैलाने की शुरुआत हुई थी उसी ने बाद में इस्लामियों को मजबूत किया और कश्मीरी पंडितों पर जुल्म ढाए।