अंग्रेज सिपाही प्लेग नियंत्रण के नाम पर औरतों-मर्दों को नंगा करके जाँचते थे। चापेकर बंधुओं ने इसका आदेश देने वाले अफसर वॉल्टर चार्ल्स रैंड का वध करने की ठानी। प्लान के मुताबिक जैसे ही वो आया, दामोदर ने चिल्लाकर अपने भाइयों से कहा "गुंडया आला रे" और...
इस फ़ोटो पर जेडीयू विधायक ने तर्क दिया कि अचानक उनके गाल पर एक कीड़ा बैठ गया था, जिसे वो हटा रहे थे। ठीक इसी बीच किसी ने यह फ़ोटो खींच ली और सोशल मीडिया पर वायरल कर दी। विधायक शर्फुद्दीन के इस तर्क में कोई दम नहीं है क्योंकि सलामी दाएँ हाथ से दी जाती है।
युवाओं ने पक्का घर बनाने के लिए ‘वन चेक-वन साइन’ नाम से अभियान चलाया। इस अभियान के माध्यम से युवाओं ने 11 लाख रुपए जुटाए। इसमें से 10 लाख रुपए से पक्का मकान तैयार किया गया और बचे हुए 1 लाख रुपए से हुतात्मा मोहन सिंह की प्रतिमा बनवाई गई।
नया फ़ैसला आने के बाद 18 अगस्त को कृष्णानगर लाइब्रेरी से पाकिस्तान का झंडा उतारा गया और भारतीय तिरंगा फहराया गया। 18 अगस्त को आज़ादी प्राप्त करने के नादिया ज़िले के संघर्ष को यादगार बनाने के लिए...
पाकिस्तानी और पाकिस्तानी मूल के अंग्रेज हमलावरों ने बच्चों और महिलाओं को भी नहीं बख्शा। हमला करने वाले इन प्रदर्शनकारियों की संख्या 1000 के आस-पास थी। लंदन के मेयर सादिक खान (पाकिस्तानी मूल का) और पुलिस पर सवाल...
जवानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “अभी तक आपने सब कुछ अच्छे तरीक़े से संभाला हुआ है, आपका आर्मी कमांडर होने के नाते मुझे आप सभी पर गर्व है, जो भी चुनौती हमारे सामने आएगी हम उस पर अच्छी तरह से फ़तह पाएँगे।”
ग़ौरतलब है कि वायु सेना के विंग कमांडर वर्धमान अभिननंदन ने पाकिस्तान के एफ-16 लड़ाकू विमान मार गिराया था। उनकी इस वीरता में उनकी सहयोगी मिंटी अग्रवाल ने अहम भूमिका निभाई थी। उस समय वो वायु सेना के रडार कंट्रोल स्टेशन पर तैनात थीं।
हर्षपाल और उनकी टीम ने जम्मू में झज्जर-कोटली में पिछले सितंबर में तीन आतंकवादियों का ख़ात्मा किया था। मुठभेड़ में गोली और छर्रे लगने से वो गंभीर रूप से घायल हो गए थे, पर वो आतंकियों के सामने मज़बूती से डटे रहे और उन्हें मार गिराने तक पीछे नहीं हटे।
कारगिल युद्ध के बाद जब 2001 में तत्कालीन डिप्टी पीएम लाल कृष्ण अडवाणी की अध्यक्षता में गठित ग्रुप ऑफ़ मिनिस्टर्स (GOM) ने समीक्षा की तो पाया कि तीनों सेनाओं के बीच समन्वय की कमी रही है। तब इस बात पर ग़ौर किया गया कि...
"बच्चे के जन्म से पहले उसकी जरूरत के बारे में जरूर सोचें। शिक्षित वर्ग ऐसा ही करता है। स्वयं की प्रेरणा से अगर आप परिवार सीमित रखते हैं तो ना सिर्फ आपका बल्कि देश का भी भला होता है और यह भी एक तरह की देशभक्ति है।"