केरल से युवाओं को आईएस में भेजने वाले अब्दुल्ला ने बड़ी ही चालाकी से अन्य सम्प्रदाय और विचार के लोगों का धर्मांतरण करवाया और फिर उन्हें अपने साथ अफ़ग़ानिस्तान के खोरासन प्रान्त में ले गया। यहाँ तक की उसकी पत्नी सोनिया खुद शादी से पहले ईसाई थी, जिसका नाम बाद में आयशा रख दिया।
26/11 की बरसी पर आतंकियों ने घाटी में दो धमाके कर दो लोगों की हत्या कर दी है। साथ ही इन धमाकों में कई लोग घायल भी हुए हैं। दोनों ही धमाके सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील इलाकों अनंतनाग और राजधानी श्रीनगर में हुए हैं।
आतंकी संगठन ‘फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद’ ने इजरायल की ओर कम से कम 200 रॉकेट दागे। इजरायल ने जवाबी कार्रवाई में 34 फिलिस्तीनी आतंकियों को मार गिराया। इसके बाद वो दया की भीख माँगते हुए...
"... पाकिस्तान आने वाले कश्मीरियों का यहाँ हीरो के तौर पर का स्वागत किया जाता था। हम उन्हें प्रशिक्षित करते थे और उनका समर्थन करते थे। हम उन्हें भारतीय सेना से लड़ने वाले मुजाहिदीन मानते थे। वे हमारे हीरो थे।"
नेतन्याहू ने कहा कि अबू-अल अता एक 'Ticking Bomb' था जो पूरे इजरायल में कई आतंकी हमले की साजिश रच रहा था। इसके बाद आतंकी संगठन 'फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद' ने 200 रॉकेट दाग कर निर्दोषों को निशाना बनाया और बदला लेने की धमकी दी।
जैश-ए-मोहम्मद ने हमले से संबंधित जानकारी और सूचनाओं के लिए 'डार्क वेब' की तकनीक का सहारा लिया, जिसमें सारी बातें इनक्रिपटेड थीं। कोडवर्ड के सहारे चल रही इस बातचीत को डिकोड कर सुरक्षा एजेंसियों ने...
"अगर मुझे जल्दी उत्तर नहीं मिला तो समझना कि स्वीडिश पुलिस और सीमा बल के लिए यह मेरी आखिरी चेतावनी है, वरना अल्लाह की मर्ज़ी से मैं किसी की परवाह किए बगैर इस राजा का सर काट दूँगा, काट कर अलग कर दूँगा, फिर चाहे इसके लिए क्यों न मुझे अपना ही सर कटवाना पड़े।"
बगदादी के बाद आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट की कमान अब्दुल्लाह कार्दश संभालने वाला था। लेकिन अमेरिकी फ़ौज की कार्रवाई में किए गए हमले के दौरान बगदादी के साथ वह भी मारा गया है।
इस विरोध प्रदर्शन के बहाने भारत और हिन्दुओं के प्रति नफरत फैलाने की इस हरकत के पीछे लंदन के कई पाकिस्तानी समर्थन वाले ग्रुप और जेकेेएलएफ यानि जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट की युनाइटेड किंगडम वाली ब्रांच का हाथ है।