अपनी प्रोफाइल में SFI से ताल्लुक बताने वाला हिमांशु सिंह और अभिराम, अगर कश्मीरी हिन्दुओं के साथ खड़े हैं तो वो फ्री कश्मीर के पोस्ट को ‘दिल’ क्यों दे रहे हैं? अगर वो दीपिका की श्रद्धांजलि सभा में शांति बना कर कुछ मिनट सुन लेते तो क्या वो खड़ा रहना नहीं कहलाता? दरअसल वामपंथी गुंडों का सारा अजेंडा बाहर आ चुका है और...
आज विधु कहते हैं कि सब कुछ भुलाकर उन लोगों से कश्मीरी पंडितों को गले मिल लेना चाहिए, प्रेम करना चाहिए और सब भुला देना चाहिए। एनडीटीवी पत्रकार रवीश कुमार कहते हैं कि निर्देशक ने वर्षों की इस चुप्पी को तोड़ने के लिए सिर्फ एक 'सॉरी' की गुज़ारिश की है, उन्होंने बहुत ज्यादा तो नहीं माँगा।
"कुछ लोगों का मानना है कि बच्चों का पैदा होना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन जानवरों की तरह अधिक बच्चों को जन्म देना समाज और देश के लिए हानिकारक है। जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून लागू होने पर यह देश के लिए अच्छा होगा।"
ये किसी फिल्म के दृश्य नहीं हैं जहाँ नाटकीयता के लिए आरी से किसी को काटा जाता है, किसी की खोपड़ी में लोहे का रॉड ठोक दिया जाता है, किसी की आँखें निकाल ली जाती हैं, किसी के दोनों गाल चाकू से चमड़ी सहित छील दिए जाते हैं, किसी के तिलक लगाने वाले ललाट को चाकू से उखाड़ दिया जाता है…
सबा नक़वी ने एक टीवी डिबेट के दौरान अपने चिरपरिचित अंदाज में हिंदुओं के खिलाफ जहर उगला। न केवल कश्मीरी पंडितों के घाटी में लौटने को लेकर एतराज जताया बल्कि जम्मू-कश्मीर पर भारत के अधिकार को लेकर भी सवाल उठाए।
नदीमर्ग तत्कालीन सीएम मुफ्ती मोहम्मद सईद के पैतृक गॉंव से महज 7 किमी दूर है। 54 लोगों की आबादी वाले इस गॉंव में 7 आतंकी घुसे। हिंदुओं को उनके नाम से पुकार घरों से बाहर बुलाया। चिनार के पेड़ के नीचे सबको जमा किया और...
बर्बरता की उस रात निहत्थे सिखों को दो समूहों में खड़ा किया गया। आतंकियों में से एक पास के ही गाँव का रहने वाला था। उसे एक सिख ने पहचान लिया। गोलीबारी से पहले उसने आतंकी से पूछा ‘चट्टिया तू इधर क्या कर रहा है’?
"उस रात इस्लामी आतंकियों ने 3 विकल्प दिए थे - कश्मीर छोड़ दो, धर्मांतरण कर लो, मारे जाओ। गिरिजा टिक्कू को सामूहिक बलात्कार कर टुकड़ों में काट दिया। बीके गंजू को गोली मारी और उनकी पत्नी को खून से सने चावल (वो भी पति के ही खून से सने) खाने को मजबूर किया।"
"मेरे पास बचपन की कई तस्वीरें नहीं हैं। जीवन और फैमिली एलबम के बीच चयन करने में कोई विकल्प नहीं है। जान बचाने के दौरान फैमली एलबम पीछे छूट गए। 30 साल हो गए। घर वापस जाने का संकल्प केवल मजबूत हुआ है।"