तीन तलाक को जुर्म बनाने वाले मोदी सरकार के बिल का समर्थन करने वाले खान ने शाहबानो मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन किया था। इस मामले में राजीव गॉंधी की सरकार ने मुस्लिम नेताओं के दबाव में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटते हुए कानून संसद से पास करवाया था।
कोझीकोड के पेरम्बरा सिल्वर कॉलेज परिसर में निकाला गया था जुलूस। कॉलेज के शासी निकाय के अध्यक्ष एके थारुवयी ने कहा कि एमएसएफ ध्वज को उल्टा रखा गया था, जिसकी वजह से वह पाकिस्तान के राष्ट्रीय ध्वज की तरह लग रहा था।
अपनी कार में बैठकर मीडिया से बात कर रहे राहुल गाँधी के पास अचानक एक लड़का पहुँचा और उनको Kiss कर लिया। लड़के की इस हरकत के बाद राहुल गाँधी मुस्कराने लगे।
सारा का परिवार जैकोबाइट ईसाई है लेकिन ऑर्थोडॉक्स गुट उनके तरीके से अंतिम क्रिया-कर्म की प्रक्रिया नहीं होने देने पर अड़ गया। तनाव को देखते हुए परिवार ने मृतक के देह-दान का निर्णय करते हुए रिसर्च के लिए उसे मेडिकल कॉलेज को सौंप दिया।
"मेरी हत्या हो सकती है। मरना तो वैसे भी है। शायद हत्या ही मेरी नियति में है। इसके लिए एफसीसी और स्थानीय प्रशासन जिम्मेदार होगा। मैं यहाँ कॉन्वेंट में रहूँगी। मैंने पुलिस से सुरक्षा भी माँगी है। लेकिन उन्होंने अब तक कुछ नहीं किया है।”
दुष्कर्म में आरोपित बिशप फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ पिछले साल सितंबर में हुए विरोध-प्रदर्शन में शामिल 5 ननों में से एक लूसी कलपूरा हैं। इसके कारण FCC ने उन्हें बर्खास्त कर 17 अगस्त तक कॉन्वेंट छोड़ने को कहा था। इसके खिलाफ उन्होंने वेटिकन में अपील कर रखी है।
केरल के एक ईसाई युवक की हत्या के मामले में उसके लिए 'दलित ईसाई' शब्द के इस्तेमाल पर The News Minute पोर्टल की सम्पादक धन्या राजेंद्रन को ट्विटर पर लोगों के गुस्से का शिकार होना पड़ा। राजेंद्रन ने केविन पी जोसेफ़ की हत्या के मामले में खबर शेयर करते हुए कहा था कि ‘दलित ईसाई’ युवक की हत्या में दस लोगों को दोषी पाया गया है।
इससे पहले लूसी कलपूरा को कॉन्वेंट में बंधक बनाने और प्रार्थना से रोके जाने का मामला सामने आया था। लूसी ने बताया कि सोमवार की सुबह जब प्रार्थना के लिए तैयार हुई तो कॉन्वेंट से निकल नहीं पाई। उसे बाहर से बंद कर दिया गया था।
लूसी ने बताया कि वह पिछले दो दिनों से कॉन्वेंट में नहीं थीं। रविवार को लौटी। सोमवार की सुबह जब प्रार्थना के लिए तैयार हुई तो कॉन्वेंट से निकल नहीं पाई। उसे बाहर से बंद कर दिया गया था।
जिस छात्र के साथ यह घटना घटित हुई थी वो बीए तृतीय वर्ष का छात्र अखिल चंद्रन था। इस घटना के पीछे वामपंथी छात्र संगठन SFI के कार्यकर्ताओं का हाथ था। चंद्रन के सीने में SFI के अध्यक्ष आर शिवरंजीथ ने चाकू मारा था, जबकि संगठन के सचिव एएन नसीम ने उसे पकड़ रखा था।