कुछ लड़कियों ने चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर पर फोन कर मदरसा प्रशासन के ख़िलाफ़ शोषण की शिकायत की। अनवर कराक्कड़ ने बताया कि पूछताछ में 1 लड़की ने बताया कि मौलवी रफीक ने उसका यौन उत्पीड़न किया। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मौलवी को गिरफ्तार कर लिया।
चाइल्ड वेलफेयर कमिटी के अध्यक्ष ने बताया कि इस मामले में पीड़िता का पिता ही सबसे ज्यादा दोषी है। लड़की के माता-पिता ने अपनी बेटी के साथ बलात्कार करने के लिए सहमति दी। इस मामले में कई लोग आरोपित हैं, कमिटी ने पुलिस से बड़े स्तर पर जाँच की अपील की है।
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अनुसार ईसाई लड़कियाँ 'लव जिहाद' का सबसे आसान शिकार बन रही हैं। केरल की हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए एनआईए से जाँच की मॉंग की गई है। केरल बिशप कैथोलिक कॉन्फ्रेंस की रिपोर्ट के अनुसार 4000 ईसाई लड़कियों को प्यार के जाल में फँसाया गया और जबरन इस्लाम कबूल करवाया गया।
केरल का कोल्लम कभी काजू उद्योग की वैश्विक राजधानी माना जाता था। यहाँ काजू उद्योग से आने वाले रुपयों से लाइब्रेरी से लेकर होटल तक बने। इतना ही नहीं, दादा साहब फाल्के अवॉर्ड जीतने वाले निर्देशक अडूर गोपालकृष्णन भी इसी उद्योग की वजह से फ़िल्में बना पाए।
पुलिस ने बताया कि एक पादरी की कब्र को एक गुट दूसरी जगह ले जाना चाहता था। चर्च के कुछ कट्टरपंथी तत्वों ने इसका विरोध किया। विरोध करने वालों का नेतृत्व थॉमस पॉल रामबन कर रहे थे। जो लोग कब्र दूसरी जगह ले जाना चाहते थे वे जैकोबाइट्स समूह के थे।
इसी तरह की एक घटना में थालास्सेरी पॉक्सो अदालत ने कैथोलिक पादरी रॉबिन वडक्कमचेरी को नाबालिग लड़की के साथ रेप करने और उसे कैद रखने के आरोप में 20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही उस पर 3 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया था।
सबरीमाला मंदिर बीते दिनों महिलाओं के प्रवेश को लेकर काफी चर्चा में रहा था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने के बाद लाखों श्रद्धालु (जिनमें महिलाएँ भी शामिल थीं) सड़क पर उतरे थे। केरल की सरकार ने इस विरोध-प्रदर्शन को दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने ऑर्थोडॉक्स और जैकोबाइट ईसाईयों के बीच विवाद में व्यवस्था दी थी कि चर्च संविधान ऑर्थोडॉक्स धड़े को चर्चों का प्रशासन करने का अधिकार देता है। केरल हाई कोर्ट के जज ने इस फैसले के विरुद्ध जाकर...
प्रगतिशील मुस्लिम चेहरे के तौर पर पहचान रखने वाले आरिफ़ मोहम्मद वंदे मातरम का उर्दू में अनुवाद कर चुके हैं। शाहबानो मामले में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन किया था और मुस्लिम कट्टरपंथियों के सामने घुटने टेकने के लिए कॉन्ग्रेस सरकार का विरोध किया था।