गिद्धों की पाँत फिर से वैसे ही बैठ गई है। फिर से हेडलाइन के आगे प्रश्नवाचक चिन्ह के सहारे वक्तव्य दिए जा रहे हैं। नेताओं द्वारा फ़र्ज़ी प्रश्न उठाए जा रहे हैं। शायद फिर उसी आकाँक्षा के साथ कि भारत कोरोना के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई हार जाएगा।
योगी आदित्यनाथ सरकार ने शहरों में लॉकडाउन लगाने से इंकार कर दिया है। यूपी सरकार ने कहा कि प्रदेश में कई कदम उठाए गए हैं और आगे भी सख्त कदम उठाए जाएँगे। गरीबों की आजीविका को भी बचाने के लिए काम किया जा रहा है।
ऑक्सीजन की कमी को दूर करने के लिए रेलवे ने विशेष ट्रेन चलाने का फैसला किया है। कई स्टील कंपनियों ने प्लांट की ऑक्सीजन की आपूर्ति अस्पतालों को शुरू की है।
ममता बनर्जी हर दिन पश्चिम बंगाल में हर बड़ी रैलियाँ कर रही हैं, लेकिन उसे ट्विटर पर साझा नहीं करतीं हैं, ताकि राजनीतिक रूप से सक्रीय लोगों के चुभचे सवालों से बच सकें और अपना लिबरल एजेंडा सेट कर सकें।
महाराष्ट्र के अस्पतालों में न सिर्फ बेड्स, बल्कि वेंटिलेटर्स और ऑक्सीजन की भी भारी कमी है। दवाएँ नहीं मिल रहीं। ऑक्सीजन और मेडिकल सप्लाइज की उपलब्धता के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भारतीय सेना से मदद के लिए गुहार लगाई है।