क्या विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने जो ट्रम्प के साथ किया, वह भारत में पीएम मोदी के साथ भी हो सकता है? तो जान लीजिए, भारत, अमेरिका नहीं है और ना ही मोदी, ट्रम्प हैं।
भारत सहित दुनिया के लोकतंत्रों को सबसे बड़ा खतरा इस समय चीन की अधिनायकवादी व्यवस्था से नहीं बल्कि अपने ही भीतर बसे इन तत्वों से है जो सड़कों पर आकर भीड़ की लाठी से देश को हाँकना चाहते हैं।
जज ने चाँद बाग इलाके की निवासी तबस्सुम की जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उसके CDRs से पता चला है कि वह दिल्ली दंगों के कई सह-अभियुक्तों के साथ लगातार संपर्क में थी।
आप किसी साधु की तस्वीर डालते हैं। ट्विटर-फेसबुक उसे कट्टर बताते हुए सेंसर कर दें। आप वेद-पुराणों से उद्धरण डालते हैं। उन्हें अन्धविश्वास की केटेगरी में रख दिया जाए। खुश मत होइए, भारत में ये दिन जल्द ही देखने को मिल सकता है।