कॉन्ग्रेस ने किसानों की क़र्ज़माफ़ी के अपने चुनावी जुमले को जनता के बीच जमकर भुनाया था, अब इस प्रकार के प्रकरणों से किसान ऋणमाफ़ी मात्र एक कॉन्ग्रेस का चुनावी पैंतरा बनकर रह गया है।
कर्ज़ माफ़ी के नाम पर यह घोटाला कितने बड़े स्तर का है, इसका पैमाना है अकेले डूंगरपुर जिले से लाभार्थियों की सूची। यहां के 1700 से अधिक किसानों के नाम उस सूची में हैं लेकिन आश्चर्य की बात है कि किसी ने भी लोन नहीं लिया था।
किसानों के ऋण भुगतान ना करने से बैंकों के वित्तीय प्रबंधन पर बुरा असर पड़ता है और वो नये कर्ज देना बंद कर देती है या धीमी कर देती है। ताजा आंकड़े भी इस दावे की पुष्टि करते दिखाई पड़ रहे हैं। बैंकों द्वारा किसानों को कर्ज देने की प्रक्रिया धीमी करने से अंततः किसानों को ही मार पड़ती है।