हैदराबाद वाला मामला मजहबी नहीं लगता लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मजहबी बलात्कार होते ही नहीं! रवीश जैसों की कोशिश यह है कि इस घटना का इस्तेमाल कर उन तमाम 'रेप जिहाद' की खबरों को चर्चा से गायब कर दिया जाए जहाँ बलात्कारी का मकसद मजहबी घृणा ही है, और कुछ नहीं।
शिवसैनिकों ने उनके स्टूडियो में घुस कर उनकी पिटाई की थी। शिवसेना कार्यकर्ताओं ने निखिल वागले के चेहरे पर स्याही पोत दी थी। उस पिटाई के बाद वागले अक्सर शिवसेना की आलोचना करते मिलते थे। बाल ठाकरे ने वागले की पटाई करने वाले शिवसैनिकों की सराहना की थी।
इससे पहले फेसबुक और ट्विटर पर आपत्तिजनक पोस्ट शेयर करने के आरोप में लखनऊ पुलिस ने 8 जून 2019 को स्वतंत्र पत्रकार प्रशांत जगदीश कनौजिया को उसके आवास से गिरफ्तार किया था।
बरखा दत्त ने एक इंटरव्यू में कबूल किया था कि मुंबई हमले के दौरान टीवी चैनलों और उनके पत्रकारों ने जिस तरह की रिपोर्टिंग की उससे सैकड़ों लोगों की जान ख़तरे में आ गई थी। यहॉं तक कि सुरक्षा बलों के जवानों की जान भी ख़तरे में पड़ गई थी।
आजतक और न्यू इंडियन एक्सप्रेस जैसे मुख्यधारा के मीडिया संस्थानों का अलावा नेशनल हेराल्ड जैसे प्रोपेगंडा पोर्टल्स तक, सबने झूठ फैलाया। पत्रकार राजदीप सरदेसाई और कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला भी नहीं चूके।
बिहार और कश्मीर के मुस्लिम छात्रों के बीच झगड़ा हुआ। वायर का दावा है कि कश्मीरी छात्रों को आतंकी कहा गया। लेकिन, एफएआईआर में इसका कोई जिक्र नहीं है। पुलिस ने भी इस दावे को झूठा करार दिया है।
"6 साल पहले राहुल गाँधी के कॉन्ग्रेस उपाध्यक्ष बनने से पहले उनकी माँ ने उन्हें चेतावनी दी थी कि 'पवार ज़हर हैं'। लेकिन, राहुल ने उनकी चेतावनी को ठीक से न समझते हुए 'पावर ज़हर है' पर भाषण दिया। लेकिन, अब उन्हें पता चल गया होगा कि..."
प्रोफेसरों ने छात्रों से कहा कि जो हो रहा है उसे होने दो और जैसा विश्वविद्यालय प्रशासन चाहता है, वैसा करो। प्रोफेसरों ने धमकी देते हुए कहा- "हम लोग तो बाहर बैठे रहेंगे फिर भी हमें रुपए मिलते रहेंगे, तुमलोग अपना सोचो। करियर चौपट कर दिया जाएगा तुम सबका।"
तानाजी का ट्रेलर जैसे ही रिलीज हुआ... क्विंट ने इस पर एक लेख लिख मारा। माफ कीजिए, लेख नहीं - जहर लिखा है, जहर! 'लिबरल' नेहरू से लेकर 'मसकुलर' मोदी तक को ठूँस दिया है इसमें। अकबर इनके लिए 'द ग्रेट' हो जाता है लेकिन शिवाजी पर इनकी सुलग जाती है!
एनडीटीवी की टीआरपी पाताल में धँसते जा रही है और रवीश नाक में धँसने वाला मॉलिक्यूल बनाने की बात कर रहे हैं। उनका मीडिया संस्थान कंगाल होने की ओर अग्रसर है और वो युवाओं को बौद्धिक रूप से कंगाल बनाने का प्रयास कर रहे हैं।