हिन्दुओं के प्रति घृणित रुख रखने वाले 'जिहादी काका' अली सोहराब ने कमलेश तिवारी की हत्या के बाद जश्न मनाया था। उसने उनकी हत्या के बाद ट्विटर पर उन्हें दीवाली की बधाई दी थी। अपने इस कृत्य से उसने हिन्दुओं को चिढ़ाने का प्रयास किया था।
पाकिस्तानी सरकार के पास 'अच्छे आतंकी' हैं, जो उनके भारत-विरोधी अजेंडे को सेना के शह पर अंजाम देती है जो सेना स्वयं खुल्लमखुल्ला नहीं कर सकती। वैसे ही एनडीटीवी जैसों के पास 'निष्पक्ष' पत्रकार हैं जो 'निजी राय' के नाम पर कॉन्ग्रेस के लिए भाजपा-विरोधी अजेंडा चलाते हैं।
राम मंदिर पर हद दर्जे की नकारात्मकता फैलाई गई। आपको जानना ज़रूरी है कि इस फ़ैसले को लेकर कैसी-कैसी वाहियात और डरावनी बातें कही गईं। इन 8 मीडिया पोर्टल्स को पहचान लीजिए और उन्होंने कैसे हिन्दुओं को बदनाम करने का प्रयास किया, यह भी देख लीजिए।
राणा अयूब अक्सर अपने भारत-विरोधी रुख का प्रदर्शन करते रहती हैं। हाल ही में उन्होंने दावा किया था कि भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर में सैकड़ों बच्चों को गिरफ़्तार कर रखा है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया था कि सुरक्षा बलों ने एक 92 वर्षीय वृद्ध महिला पर हमला किया।
"जब तुम अपने लोकतंत्र को अजायबघर (म्यूजियम) में तब्दील कर फुरसत पा लो तो दुनिया के और भी पुराने पार्लियामेंट हाउस को, जैसे वेस्टमिंस्टर को गौमूत्र का अध्य्यन करने वाला संस्थान बनाने या फिर यूएस कैपिटोल को वैदिक काल में उड्डयन संबंधी संग्रहालय बनाने में अपनी सेवा देने के लिए तैयार रहो।"
'द हिन्दू' लिखता है कि ऑटोमोबाइल सेक्टर में खुशियाँ आ गई हैं। उसी दिन उसका भाई 'बिजनेस लाइन' लिखता है कि खुशियाँ नहीं आईं हैं। ये दोनों 'घोड़ा-चतुर' खेल कर पाठकों को पागल बना रहे हैं। एक ही ख़बर को दो तरीके से पेश किया जा रहा है। मंदी है भी, नहीं भी। सब ठीक भी है, नहीं भी......
बगदादी और उसका आतंकी संगठन आईएसआईएस 5 लाख से भी अधिक हत्याओं का गुनहगार है। फिर भी बीबीसी ने उसे ऐसे प्रस्तुत किया था, जैसे वो मानव-सेवा के लिए बलिदान हुआ कोई सामाजिक कार्यकर्ता हो।
दिल्ली प्रेस की पहुँच लाखों पाठकों तक है। इंग्लिश में कारवां, हिंदी भाषी के लिए सरिता और बच्चों के लिए चंपक। मतलब इनका फैलाया प्रोपेगेंडा और भी घातक है। इनसे बचना है क्योंकि इस बार इन्होंने बच्चों को भी नहीं बख्शा। आर्टिकल-370 के नाम पर चंपक में जो जहर इन्होंने बोया है, वो...
BBC में काम करने वाली समीरा अहमद अपने संस्थान पर महिलाओं को पुरुषों से कम पेमेंट देने का आरोप लगा कर कोर्ट तक घसीट लाई हैं। जेरेमी (पुरुष) को जिस 15 मिनट के शो के लिए 2.72 लाख रुपए/शो मिलते थे, वहीं समीरा को मात्र 40,000 रुपए।
'बगदादी फुटबॉल के स्टार थे' से लेकर 'बगदादी अंतर्मुखी थे' तक, बीबीसी ने ISIS के सरगना को ऐसे सम्मान दिया, जैसे उसने उसकी रूह की शांति के लिए तर्पण की जिम्मेदारी ली हो। आतंकी बगदादी की मौत से शोकग्रस्त बीबीसी के प्रोपेगेंडा का काला चिट्ठा पढ़ें उसके ही शब्दों में।