अजित पवार को जाँच एजेंसियों ने दी क्लीन चिट: मीडिया व कॉन्ग्रेस के दुष्प्रचार का Fact Check

महाराष्ट्र एंटी-करप्शन ब्यूरो के डायरेक्टर परमबीर सिंह ने मीडिया के सामने आकर इस दुष्प्रचार का ख़ुद खंडन किया। उन्होंने बताया कि एजेंसी सिंचाई घोटाले से जुड़े 3000 टेंडरों की जाँच कर रही है। उन्होंने.....

मीडिया में ऐसी ख़बरें चल रही हैं कि एंटी-करप्शन ब्यूरो ने अजित पवार के ख़िलाफ़ चल रहे सारे मामलों में जाँच बंद कर के उन्हें क्लीन चिट दे दिया है। साथ ही सोशल मीडिया में इस ख़बर को आधार बना कर यह पूछा गया कि क्या भाजपा के साथ आते ही अजित पवार ‘क्लीन’ हो गए हैं और उन्हें देवेंद्र फडणवीस की सरकार का समर्थन करने के बदले यह इनाम दिया गया है? आजतक और न्यू इंडियन एक्सप्रेस जैसे मुख्यधारा के मीडिया संस्थानों का अलावा नेशनल हेराल्ड जैसे प्रोपेगंडा पोर्टल्स तक, सबने झूठ फैलाया। पत्रकार राजदीप सरदेसाई और कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला भी नहीं चूके।

आजतक ने पूछा कि क्या भाजपा के साथ आते अजित पवार ‘क्लीन’ हो गए हैं? साथ ही लिखा कि उनसे जुड़े सिंचाई घोटाले के 9 मामलों को बंद कर दिया गया है।

आजतक जैसे बड़े मीडिया संस्थान भी नहीं रहे पीछे

राजदीप सरदेसाई ने ‘गोलमाल है भाई, सब गोलमाल है’ गाने का प्रयोग करते हुए तंज कसा कि केस को बंद करने की टाइमिंग संदेहास्पद है।

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इसी तरह कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने लिखा कि भ्रष्टाचार के मामलों को बंद किए जाने के एवज में समर्थन माँगा जा रहा है। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर धब्बा करार किया।

इधर कॉन्ग्रेस मुखपत्र ‘नेशनल हेराल्ड’ ने लिखा कि अजित पवार को इरीगेशन स्कैम मामले में क्लीन चिट दे दी गई है।

नेशनल हेराल्ड ने फैलाया झूठ: अजित पवार को मिली क्लीन चिट

लेकिन, सच्चाई कुछ और ही निकली। दरअसल, जिन 9 सिंचाई घोटालों की फाइलें बंद की गई थीं, उनमें से एक भी अजित पवार से सम्बंधित नहीं थीं। उन घोटालों का अजित पवार से दूर-दूर तक नाता नहीं था लेकिन मीडिया ने इसे ग़लत तरीके से फैलाया। हालाँकि, जिन केसों को बंद किया गया, वो भी सशर्त रूप से। अगर कुछ और आता है तो उन्हें फिर से खोला जा सकता है।

महाराष्ट्र एंटी-करप्शन ब्यूरो के डायरेक्टर परमबीर सिंह ने मीडिया के सामने आकर इस दुष्प्रचार का ख़ुद खंडन किया। उन्होंने बताया कि एजेंसी सिंचाई घोटाले से जुड़े 3000 टेंडरों की जाँच कर रही है। उन्होंने 9 मामले बंद होने पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ये रूटीन इन्क्वाइरी थी। साथ ही उन्होंने साफ़ कर दिया कि इनमें से कोई भी मामला महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री अजित पवार से जुड़ा नहीं है।

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