चाहे कुंभ हो या काँवड़ यात्रा, इनका केवल धार्मिक और सामाजिक महत्व ही नहीं है। ये अर्थव्यवस्था में भी अपना योगदान देते हैं। इसका आर्थिक पक्ष एक ही धर्म के लोगों को फायदा नहीं पहुँचाता।
झारखंड के मुस्लिम बहुल इलाकों में सामान्य स्कूल को उर्दू स्कूल बनाए जाने के मामले सामने आने के बाद पता चला है कि प्रदेश के 5 जिलों में 70 स्कूल इसी तरह उर्दू स्कूल बने हैं।