हसीब ने लिखा, "मुस्लिम एक हो गए तो पूरी फ़ोर्स लगाने के बाद भी रोक नहीं मिलेगा। शुक्र मनाओ कि मुसलमान फिरके-फिरके में पड़े हुए हैं और ये मौलवी इन्हें एक नहीं होने दे रहे हैं।"
हिन्दू दुकानदारों ने कहा कि इस्लामी नाम रख कर प्रति घंटे लाखों रुपए का फायदा हो तो भी वो अपने असली पहचान में लाइन तो दूर मात्रा और शब्द का भी बदलाव नहीं करेंगे।