अपनी किताब में उसने दावा किया कि हिंदुत्व को बढ़ावा देने के लिए बालासाहेब ने दलितों की हत्या तक करवा दी थी। सुधीर ने अपनी इस किताब में 1974 के वर्ली दंगे का ज़िक्र करते हुए लिखा है कि इस दौरान मराठवाड़ा की दलित महिलाओं के साथ दुष्कर्म हुआ था।
भीमा-कोरेगॉंव हिंसा के आरोपितों की जमानत याचिका हाल ही में खारिज की गई थी। एनसीपी नेता का कहना है कि इस मामले में पिछली सरकार ने फर्जी मामले दर्ज किए थे। उन्होंने आरे मेट्रो मामले की तरह इससे जुड़े केस भी बंद करने को कहा है।
सुप्रिया सुले की पार्टी NCP ने 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान, राफ़ेल फाइटर जेट्स की ख़रीद में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए पीएम मोदी और अनिल अंबानी पर निशाना साधा था। वहीं, दूसरी तरफ आज उन्हीं अनिल अंबानी के साथ पार्टी कर रही हैं!
कॉन्ग्रेस की तरफ से भी उपमुख्यमंत्री पद की माँग। कॉन्ग्रेस के बालासाहेब थोराट राज्य के नए उप मुख्यमंत्री हो सकते हैं। उधर अजित पवार भी मुँह फुलाए बैठे हैं। NCP अपने हाथ से डिप्टी CM पद जाने नहीं देना चाहती। उद्धव ठाकरे के फ्लोर टेस्ट से पहले महा-ड्रामा!
बाल ठाकरे की गिरफ़्तारी से मुंबई में माहौल गर्माने के साथ-साथ सियासी समीकरण भी बिगड़े थे। तब शिवसेना प्रमुख के ख़िलाफ़ व्यक्तिगत प्रतिशोध के रूप में भुजबल को ही दोषी ठहराया गया था। बाल ठाकरे की गिरफ़्तारी शिवसेना के लिए एक भावनात्मक मुद्दा रहा है। पार्टी बार-बार इस घटना के लिए एनसीपी से माफ़ी की माँग करती रही लेकिन अब...
शपथ ग्रहण का समय गठबंधन के अनुकूल नहीं। इस समय वृष आरोही है। शनि, शुक्र और चंद्रमा भी आठवें घर में, जो अंत समय को दर्शाता है। मंगल और बुध भी छठे स्थान पर, जो दुश्मनों का घर है। इसलिए ये गठबंधन उसी समय बिखर जाएगा, जब ये सभी ग्रह राहु-केतु के मध्य आएँगें।
जब अजित भाजपा के साथ चले गए थे तो सुप्रिया ने अपने व्हाट्सएप स्टेटस में लिखा था कि पवार परिवार और पार्टी बॅंट गई है। उन्होंने लिखा था, “आप जीवन में किस पर भरोसा करोगे। इतना ठगा हुआ कभी महसूस नहीं हुआ। उनका बचाव किया, उन्हें प्यार दिया। देखो बदले में क्या मिला मुझे।”
उद्धव ने इस दौरान आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए कहा कि शिवसेना क्या चीज है, अब पता चलेगा। उन्होंने एनसीपी के साथ गठजोड़ को सही बताते हुए यहाँ तक कह दिया कि उनका गठबंधन अगले 30 सालों तक चलेगा। विधायकों को निष्ठावान रहने की शपथ भी दिलाई गई।
एनसीपी ने उन्हें विधायक दल का नेता पद से तो हटा दिया है लेकिन पार्टी से नहीं निकाला है। जयंत पाटिल, छगन भुजबन और वलसे पाटिल सहित कई नेताओं ने अजित के साथ बैठक कर उन्हें मनाने की कोशिश की। अजित पवार ने क्या जवाब दिया, यहाँ जानिए।
कॉन्ग्रेस और शिवसेना के भीतर लड़ाई चल रही है। कॉन्ग्रेस का एक खेमा शुरुआत से ही शिवसेना के साथ जाने के हक में नहीं रहा है। पूर्व उप मुख्यमंत्री छगन भुजबल ने अजित पवार को बताया है कि पार्टी में 30-35 ऐसे विधायक हैं, जो उनकी अनुपस्थिति में असहज महसूस कर रहे हैं। ये आँकड़ा बढ़ भी सकता है।