मलाला का न्यूज़ीलैंड के मुद्दे पर दुख प्रकट करना और रवीना और रीना पर शांत हो जाना दिखाता है कि इंसान कितना ही प्रोग्रेसिव क्यों न हो जाए, लेकिन उसके भीतर मज़हब, और मज़हब का डर हमेशा जिंदा रहता है।
लोन ने एक उत्साही भीड़ से कहा, "मेरा पार वाला वो मुल्क़ (पाक) है, वो आबाद रहे, वो क़ामयाब रहे, हमारी और उसकी दोस्ती बढ़े, पाकिस्तान और हिंदुस्तान की दोस्ती आपस में रहे, उस दोस्ती का मैं आशिक़ हूँ...
सिंध प्रांत के कई हिंदुओं ने कथित तौर पर अपहरणकर्ताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज करने से इनकार करने के बाद पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। पाकिस्तान में हिंदू देश के सबसे वंचित और सबसे ज्यादा सताए गए अल्पसंख्यकों में से एक हैं।
पित्रोदा को पुलवामा हमले के बारे में पूरी जानकारी नहीं है, बावजूद इसके उनका कहना है कि हमले के बाद हमने जो रिएक्ट किया और कुछ जहाज़ भेज दिए वो सही तरीक़ा नहीं था।
प्रस्ताव के पास होने के बाद यूरोपियन यूनियन के सभी 28 देश अपनी तरफ से इस बात के लिए पूरी कोशिश करेंगे कि पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है।
हम उनके न्यूजीलैंड हमले पर दुख जाहिर करने पर सवाल नहीं उठा रहे। उठाएँगे भी क्यों? हम तो जानना चाहते हैं कि पुलवामा पर उनके चुप रहने के क्या कारण हैं? 'कर्मभूमि' की रक्षा पर तैनात सैनिकों पर हुए हमले से जिनका दिल नहीं पसीज़ा वो न्यूजीलैंड हमले पर एकदम से भावुक हो उठे! कैसे?
ब्रिटिश राज के दौरान ग़रीब हिन्दुओं को ईसाई बनाया गया था। आज उन्हें पाकिस्तान के चर्चों, घरों व स्कूलों में मारा जा रहा है। उनके पक्ष में बोलने वाले मंत्री व गवर्नरों तक की हत्या कर दी जाती है। समझें ईशनिंदा क़ानून का व्यापक और कुटिल कुचक्र।
विकसित देशों में इमीग्रेशन आज एक बड़ी समस्या बन चुका है। किसी देश में बाहर से आकर बसने वाले अपने साथ अपनी संस्कृति, खानपान, भाषा, पहनावा, उपासना पद्धति और रहन सहन का हर वो तरीका लेकर आते हैं जो उस देश से भिन्न होता है जहाँ वे जाते हैं।
ट्विटर पर इसके ख़िलाफ़ पोस्ट की गई जिसमें कटाक्ष करते हुए लिखा गया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को ही नहीं बल्कि कराची के इस डॉक्टर को भी नोबेल प्राइज़ मिलना चाहिए।