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कांशीराम की चेली हूँ, जैसे को तैसा जवाब देना जानती हूँ: मायावती

मायावती ने कहा कि हम दब्बू किस्म के लोग नहीं हैं, जो सुनकर बैठ जाएँगे, घबरा जाएँगे। उसका मुँहतोड़ जवाब देना भी हमें आता है।

परमादरणीय रवीश कुमार! अपना ‘कारवाँ’ रोक दीजिए, आपको हिंदी पत्रकारिता का वास्ता

अपने पिछले तमाम एजेंडों में मोदी सरकार और उससे सम्बंधित पदाधिकारियों को नीचा दिखाने और अपमानित करने के तमाम नाकाम प्रयासों के बाद रवीश कुमार एक बार फिर से एक काल्पनिक वाकया लेकर जनता के सामने आए हैं।

TV एक्ट्रेस को क्यों बनाया HRD मंत्री: एक्टर से स्वास्थ्य मंत्री बने शत्रुघ्न सिन्हा का बेकार सवाल

भाजपा को अपनी पार्टी बताते हुए सिन्हा ने कहा कि उन्होंने कभी पार्टी के ख़िलाफ़ नहीं बोला और अब भी पार्टी के ख़िलाफ़ नहीं बोल रहे हैं, बल्कि पार्टी को आईना दिखा रहे हैं।

गौ-भक्त केजरीवाल, क्या से क्या हो गए देखते देखते

ये गौभक्ति का निर्णय शायद केजरीवाल जी ने ट्विटर पर लोगों से जनादेश लेकर ही किया है

लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी पारित हुआ आरक्षण विधेयक, क्या रही पक्ष और विपक्ष के नेताओं की राय

राज्यसभा में भी विधेयक पारित हो जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान निर्माताओं और स्वतंत्रता सेनानियों को याद करते हुए ट्विटर पर जनता को बधाई दी

क्या है नागरिकता संशोधन विधेयक पर बहस का कारण?

राजीव गांधी सरकार के दौर में असम गण परिषद से समझौता हुआ था कि 1971 के बाद असम में अवैध रूप से प्रवेश करने वाले बांग्लादेशियों को निकाला जाएगा।

पंजाब AAP MLA सुखपाल खैहरा ने लगाए केजरीवाल पर आरोप, दिया इस्तीफ़ा

पिछली पंजाब रैली के बाद केजरीवाल ने खैहरा और कंवर संधू को अनुशासनहीनता के कारण निलंबित कर दिया था

कॉन्ग्रेस ने किया किसानों को कर्ज़ के लिए मजबूर, अब कर रही है कर्जमाफ़ी के नाम पर गुमराह: PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भाजपा और काँग्रेस में सबसे बड़ा अंतर ये है कि काँग्रेस हमेशा किसानों को वोट बैंक की तरह देखती आई है, जबकि उनके लिए किसान अन्नदाता हैं।

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का जाना भड़काऊ, उकसाने वाला और गैरज़रूरी काम: शशि थरूर

अक्सर अपने विवादित बयानों और अजीबोगरीब अँग्रेजी शब्दावली के इस्तेमाल के लिए चर्चाओं में रहने वाले शशि थरूर ने सबरीमाला मंदिर विवाद पर अपना विचार रखकर सबको चौंका दिया है

बढ़ते विवादों पर अनुपम खेर ने तोड़ी चुप्पी, सिनेमा और राजनीति को बताया एक दूसरे का असली चेहरा

अनुपम का कहना है कि 'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' किसी नेता की छवि बिगाड़ने के लिए बनाई गई फ़िल्म नहीं है, बल्कि इस फ़िल्म में ये दर्शाया गया है कि किस तरह एक साधारण व्यक्ति अपनी क्षमता और काबिलियत के आधार पर देश का प्रधानमंत्री बनता है।

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