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किसी का हिंदू-घृणा फैलाना काम, किसी की हिंसा भड़काने की हिस्ट्री: जानिए कौन हैं CJP प्रोटेस्ट में शामिल हुए ये 6 आंदोलनजीवी, ‘NEET’ नहीं सरकार-विरोध पर रहा फोकस

NEET पेपर लीक के खिलाफ विरोध कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन में 'आंदोलनजीवी' की जमात देखने को मिल रही है। ये वही जमात है जो हर प्रदर्शन में अपना मोदी-विरोधी, हिंदू-घृणा प्रोपेगेंडा फैलाती है और कुछ की हिंसा भड़काने की हिस्ट्री भी रही है।

आंदोलन जब तक सुधार के लिए हो तो क्रांति है, लेकिन जब वह सिर्फ विरोध के लिए हो तो केवल एक पेशा (प्रोफेशन) बन जाता है। इस पेशे को अपनी पहचान बना चुकी उस जमात को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भरी संसद में ‘आंदोलनजीवी’ नाम दे चुके हैं। आंदोलनजीवी की यही जमात अब जंतर-मंतर पर चल रहे सोशल मीडिया से सटायर के तौर पर उभरी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रोटेस्ट (प्रदर्शन) में भी पहुँच चुकी है।

दरअसल, खुद को ‘युवाओं की आवाज’ बताने वाली CJP देश में पेपर लीक, खासकर हाल ही में NEET पेपर लीक के खिलाफ विरोध कर रही है। इनकी मुख्य माँगों में से एक देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। पहले चरण में 06 जून 2026 को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया गया था, जब धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा माँगने के लिए CJP के प्रमुख होने का दावा करने वाले अभिजीत दिपके अमेरिका से भारत लौटे थे।

इसके बाद अभिजीत दिपके ने पुणे, बेंगलुरु, लखनऊ, जयपुर समेत कई शहरों में इसी मुद्दे के साथ प्रदर्शन आयोजित किए। इन प्रदर्शनों में अभिजीत दिपके को उतनी मीडिया कवरेज नहीं मिली, जितनी उनके 06 जून 2026 के दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान मिली थी। या यूँ कहें कि ‘आंदोलनजीवी’ की जो भीड़ अब राजधानी में अपना डेरा जमा चुकी है, वह देश के बाकी हिस्सों में प्रदर्शन कर अपना स्तर गिराना नहीं चाहती।

इसीलिए अभिजीत ने 20 जून 2026 से दोबारा जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की घोषणा की। यहाँ आम छात्र तो पहुँचे ही पहुँचे, लेकिन लाइमलाइट में वो आंदोलनजीवी रहे जिनके आड़ अभिजीत और उनकी CJP गैंग को सरकार के विरोध में उतरने का लाइसेंस मिल जाता है। इनमें प्रमुख चेहरा बने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत जेल जा चुके क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक, जो पिछले लगातार 5 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। सिर्फ सोनम वांगचुक ही नहीं, इस प्रदर्शन में कई नामित आंदोलनजीवी और चेहरे भी सामने आए हैं। आइए CJP प्रदर्शन के इन 12 दिनों से चल रहे प्रदर्शन में शामिल हुए उन आंदोलजवियों के रिकॉर्ड हिस्ट्री के बारे में जानते हैं।

सोनम वांगचुक

सोनम वांगचुक ने CJP को तब ही अपने आंदोलनजीवी पेशे का क्लासवर्क समझ लिया था, जब खुद इन ‘कॉकरोचों’ को भी नहीं मालूम था कि ये ऐसा कोई प्रदर्शन शुरू करने जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर मीम और कॉमेडी करने वाली CJP को सोनम वांगचुक ने पहले ही भाप लिया, उन्होंने इस युवाओं की जनसंख्या वाला एक हुजूम माना और लग गए उसके पीछे उन्हें समर्थन देने। क्योंकि आज हर एक राजनीतिक पार्टी भी यही कर रही है, कोई भी कदम उठाने से पहले देश के लगभग 65% युवाओं के बारे में सोच रही है क्योंकि ये ही उनका वोट बैंक है।

इसी युवाओं की टोली को सोनम वांगचुक ने अपना एजेंडा चलाने के लिए इस्तेमाल किया। सबसे पहले 06 जून को जंतर-मंतर पर हुए CJP के प्रदर्शन में ‘सलाहकार’ के तौर पर काम किया और तभी से ही वह प्रदर्शन का मुख्य चेहरा बन गए। इसके बाद CJP प्रदर्शन के जंतर-मंतर पर 20 जून से शुरू हुए अगले प्रदर्शन के दौरान सोनम वांगचुक विदेश दौरे पर थे लेकिन उन्हें युवाओं के प्रदर्शन पर संदेह हुआ तो उन्होंने खुद मोर्चा संभाला और एक हफ्ते बाद 28 जून को लौटकर अनशन पर उतर गए। अब पिछले 5 दिन से CJP के मंच पर गद्दा बिछाकर भूखे लोटे रहते हैं।

बात करें सोनम वांगचुक के आंदोलनजीवी बनने के अनुभवों की तो वे पिछले साल लद्दाख में आमरण अनशन पर बैठे थे। इस दौरान सोनम वांगचुक ने मोदी सरकार पर टिप्पणी की थी, “ये ऐसे राम निकले जो सीता को रावण से छुड़ा कर लाए, लेकिन घर नहीं ले गए बल्कि भरी बाजार में बिकने के लिए रख दिया।” उनके इसी अनशन के दौरान शांति वाले क्षेत्र लद्दाख में हिंसा भड़की थी। रिपोर्ट्स में सामने आया था कि वांगचुक ने ही ‘हाथ में पत्थर लेने‘ के लिए लोगों को उकसाया था। वांगचुक को NSA के तहत गिरफ्तार किया गया था। लद्दाख से दूर जोधपुर सेंट्रल जेल में उन्हें रखा गया था, जहाँ वे 6 महीने जेल में रहे।

वांगचुक की संस्थाओं पर भी हेराफेरी मिली थीं। उनक प्रमुख संस्था हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स लद्दाख (HIAL) की फंडिंग में गड़बड़ियाँ पाई गई थीं और उनकी स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) में पाए गए उल्लंघनों के बाद एफसीआरए (FCRA) रजिस्ट्रेशन भी रद्द कर दिया गया था।

योगेंद्र यादव

जैसे ही आंदोलन को राजनीतिक और वैचारिक समर्थन देने वाले चेहरों की जरूरत पड़ी, वैसे ही फेल राजनीति के बाद आंदोलनजीवी बने योगेंद्र यादव भी प्रदर्शन स्थल पर पहुँच गए। यहाँ उन्होंने मंच से अपने पुराने प्रदर्शनों को याद करते हुए जंतर-मंतर के साइज की बात की। उन्होंने कहा कि 15 साल पहले वह भी इसी जगह भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे थे, तब में और अब में फर्क सिर्फ यह है कि जंतर-मंतर का आकार छोटा हो गया है और पहले ये बैरिकेडिंग नहीं हुआ करते थे। उन्होंने जंतर-मंतर के सिकुड़े आकार को लोकतंत्र के सिकुड़ने जैसा बताया।

योगेंद्र यादव का इस प्रदर्शन स्थल के लिए भावुक होना बनता भी था क्योंकि बीते कई वर्षों का उनका रिकॉर्ड बताया है कि वे केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रहे, बल्कि दिल्ली में हिंदू-विरोधी प्रदर्शन, किसान आंदोलन, भारत जोड़ो यात्रा समेत कई बड़े आंदोलनों में शामिल होकर अपनी राजनीति चमकाई है।

किसान आंदोलन को योगेंद्र यादव ने लीड किया और भारत बंद का आह्वान तक किया और जब लोगों ने इसमें व्यापक भागीदारी नहीं दी तो लोगों को उकसाने लगे। इसके अलावा वे नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध प्रदर्शनों में भी सक्रिय दिखाई दिए। बाद में कॉन्ग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गाँधी के साथ उनकी मौजूदगी ने भी यह संदेश दिया कि चुनावी राजनीति से अलग होने के बावजूद वे लगातार विपक्षी राजनीतिक अभियानों के साथ खड़े रहे।

यानी लगभग हर बड़े सरकार-विरोधी आंदोलन में उनकी मौजूदगी दर्ज की जाती रही है। इसी वजह से CJP के जंतर-मंतर प्रदर्शन में उनकी मौजूदगी से आंदोलन की विचारधारा पर असर पड़ता है। क्योंकि यादव का हिंदू विरोधी रिकॉर्ड भी सबके सामने है। जब ज्ञानवापी विवाद पर उन्होंने कहा था कि कथित मस्जिद पर दावा करने के कारण 500 साल बाद इस्लामी कट्टरपंथियों के हाथों हिंदुओं को भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। ये वहीं योगेंद्र यादव हैं जिन्होंने देश में ‘हिंदी, हिंदू और हिंदुस्तान’ का विरोध किया था।

बृंदा करात

सरकार-विरोधी प्रदर्शन हो और कम्युनिस्ट चेहरे सामने न आए यह तो उचित ही नहीं है। इनमें कम्युनिस्टों की ‘दीदी’ CPI(M) की पोलितब्यूरो की सदस्य बृंदा करात CJP के प्रदर्शन में शामिल हुईं। करात ने मंच से कहा कि जब उन्होंने देखा कि NEET की परीक्षा को लेकर भ्रष्टाचार और लूट हो रही है तो वह खुद को रोक नहीं पाईं। ये वही बृंदा करात हैं जो 2023 में जब वह पहलवानों के प्रदर्शन में पहुँची और खुद पहलवानों ने उन्हें प्रदर्शन से भगा दिया यह कहकर कि प्रदर्शन को राजनीति मत बनाइए।

वह हर मोर्चे पर सरकार का विरोध करती नजर आ जाती हैं। कभी संसद के बाहर, तो कभी ट्विटर पर तो कभी बिन बुलाए प्रदर्शनों में शामिल होकर। इनका हर आंदोलनजीवी के विशेषता की तरह हिंदुओं से घृणा भी सामने आ चुकी है। जब बृंदा करात अपनी पार्टी का नेतृत्व करते हुए राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में जाने से इनकार कर दिया था और उस कार्यक्रम को राजनीतिकरण बताया था। अब खुद युवाओं के प्रदर्शन का चेहरा बन रही हैं। मंच से सीधे सरकार को ललकारने की बात कह रही हैं।

प्रशांत भूषण

पेशे से वकील और कुकर्मों से राजनीति में शामिल होने की इच्छा जता चुके प्रशांत भूषण भी CJP प्रदर्शन का हिस्सा न बने। ऐसा हो ही नहीं सकता क्योंकि उन्होंने कहाँ कोई प्रदर्शन छोड़ा है, वे तो दिल्ली में CAA के विरोध के नाम प्रदर्शन कराने के मास्टरमाइंड रह चुके हैं। ऐसे में उनका CJP के प्रदर्शन में आकर प्रदर्शन करने की सीख देना बनता ही था।

उन्होंने तो राहुल गाँधी तक को ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में जुड़कर अपने आंदोलनजीवी होने के सबूत पेश किए। व्यंग्य की बात यह रही राहुल गाँधी के साथ कदम मिलाते हुए प्रशांत भूषण ने देश में भतीजावाद के खिलाफ आवाज उठाई। ठीक इसी बेवकूफी के साथ वह CJP के मंच पर युवाओं और छात्रों को सीख देने पहुँचे थे।

क्योंकि अब तक CJP के प्रदर्शन में हिंदू-विरोधी स्वर सामने नहीं आए हैं तो प्रशांत भूषण प्रदर्शनकारियों को बताने गए होंगे कि कैसे किसी भी प्रदर्शन से पहले बैठक की जाती है जहाँ हिंसा भड़काने का प्लान बनाया जाता है और फिर प्रदर्शन की आड़ में हिंदुओं के खिलाफ माहौल बनाया जाता है। और प्रशांत भूषण जैसे वकील को उनके ‘कांडों’ पर सुप्रीम कोर्ट भी लताड़ लगाने से खुद को नहीं रोक पाता।

सागरिका घोष

बंगाल में सत्ता गवा चुकी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की स्टार नेता सागरिका घोष का राजनीतिक करियर डूबने को है लेकिन लाइमलाइट में आने के लिए वह भी CJP के मंच पर पहुँच गईं। बंगाल में पूरी पार्टी खत्म होने को है, पार्टी के सांसद बागी निकल गए, ममता बनर्जी को अब कोई सहारा नहीं बचा लेकिन तब सागरिका घोष ने सामने आकर ‘अपनों’ के समर्थन में नहीं जुटीं। बल्कि अगर दो-तीन बयान या ट्वीट कहीं कर भी दिए तो उनमें भी पार्टी की आंतरिक विवाद को सरकार के ऊपर मढ़ दिया।

लेकिन यहाँ बात नहीं बनी तो अब सागरिका घोष CJP प्रदर्शन में शामिल होकर देश के युवाओं का समर्थन का बहाना लेकर सरकार-विरोधी बयानबाजी करने के लिए पहुँच गईं।

विजेंद्र चौहान

छात्रों के बीच मशहूर प्रोपेगेंडाबाज और हिंदू-विरोधी बयानों का बैकग्राउंड लेकर चलने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के प्रोफेसर विजेंद्र सिंह चौहान ने भी CJP का प्रदर्शन ज्वाइन किया। लेकिन एक शिक्षक के तौर पर जहाँ उन्हें NEET पेपर लीक के मुद्दे पर छात्रों की आवाज बनना थी वहीं वो मंच से ‘निकोबार’ की बात करने लगे।

विजेंद्र चौहान वही चेहरा हैं, जो शिक्षा क्षेत्र में अपना बड़ा नाम कर हिंदू-विरोधी बयानबाजी और जातिवाद की बात करते हैं। उनका दावा है कि ChatGPT (Generative Pre-trained Transformer) हिंदू समाज के सवर्णों द्वारा प्रशिक्षित किया गया है, इसका डेटा सवर्णों की तरफ झुका हुआ है क्योंकि इसे ट्रेन करने वाले लोग उसी वर्ग से आते हैं।

‘आंदोलनजीवी’ से CJP के प्रदर्शन का सच

ये सिर्फ कुछ नाम हैं, इनके अलावा अंजली भारद्वार, कम्युनिस्ट एमए बेबी, यूट्यूब टीचर अभिनय सर, किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी, काशिफ सर समेत कई आंदोलनजीवी इस प्रोटेस्ट का हिस्सा बने हैं। और इनके रिकॉड हिस्ट्री से साफ है कि ये हर उस आंदोलन में शामिल हुए हैं जिसमें मोदी सरकार के खिलाफ आवाज उठाई जा रही हैं, बाकी देश में तमाम मुद्दों पर इनके होंठ सिल जाते हैं।

लेकिन CJP जैसा प्रोटेस्ट इनके लिए खुद की राजनीति चमकाने का जरिया बन जाता है। ऐसे प्रोटेस्ट से ये युवाओं का समर्थन तो हासिल कर ही लेते हैं साथ ही उन विरोधी पार्टियों की नजर में भी आ जाते हैं जो खुद मोदी सरकार को आए दिन गालियाँ देती हैं। दिल्ली में हुए CAA प्रदर्शन हों या JNU में डफलीबाजों का कोई नुक्कड़-नाटक जैसा प्रदर्शन हो… इनमें सामने आए कन्हैया कुमार जैसे चेहरे आज विरोधी पार्टियों के नेता बनकर बैठे हैं।

इन्हें छात्रों और युवाओं के असल मुद्दों से फर्क नहीं पड़ता, इनके लिए लाइमलाइट में आना जरूरी है। इनके लिए आंदोलन अब पेशा बन चुका है इसीलिए जहाँ भी मोदी-विरोधी या सरकार विरोधी नारे सुनाई देने लगते हैं तो ये झोला उठाकर वहाँ की ओर मार्च करने लग जाते हैं।

यानी अगर ‘कॉकरोचों’ का NEET पेपर लीक के विरोध में जो प्रदर्शन जारी है, उसमें अगर दो-तीन छात्र वाकई में अगर परेशान हैं तो इन आंदोलनजीवियों के चलते उन्हें भी गंभीर नहीं लिया जा सकता। क्योंकि कॉकरोच जनता पार्टी का हाईकमान का पास्ट रिकॉर्ड तो सबके सामने ही है, चाहे वह अभिजीत दिपके हो, सौरव दास हो, विजेता दाहिया हो या आशुतोष रांका हो… इन सभी चेहरों का जुड़ाव तो पहले से ही दिल्ली दंगों के साजिशकर्ता उमर खालिद से लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) से रहा है। इसीलिए अब तक जंतर-मंतर के उस मंच से NEET पेपर लीक के समाधान की बात के बजाए जातिवाद, अंबेडकरवाद, सरकार-विरोधी बयान से लेकर हर प्रोपेगेंडा फैलाया जा रहा है।

कुल मिलाकर बात यह है कि NEET पेपर लीक पर बात होनी चाहिए, पर आंदोलनजीवी इसका हिस्सा बनकर सरकार के प्रति अपनी नफरत फैलाने की जगह सचमुच छात्र की मदद करना चाहते हैं तो समाधान की बात करें।

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