राहुल गाँधी 'ओजस्वी वक्ता' हैं। उनके भाषण 'बहुत मजेदार' होते हैं। यह किसी से छिपा नहीं। उनका ऐसा ही एक भाषण कृषि कानूनों पर वायरल हो रहा है। जरा, उनके तर्क समझिए और समझाइए।
राहुल गाँधी की द्वारा साझा की गई इस तस्वीर को प्रोपेगेंडा बताते हुए भाजपा आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने लिखा कि पुलिसकर्मी ने उस किसान को छुआ तक नहीं।
साल 2008 में जब पाकिस्तान के आतंकी मुंबई के लोगों को सड़कों पर मार चुके थे उसके कुछ दिन बाद ही गाँधी परिवार के युवराज अपने दोस्त की संगीत रस्म को इंजॉय कर रहे थे।
कॉन्ग्रेस के लिए पहला काम था-राहुल गाँधी का संदेश शेयर करना ताकि किसी मायने में उसकी गंभीरता सोशल मीडिया यूजर्स के सामने न दब जाए और लोग अहमद पटेल के गम में राहुल गाँधी के कोट को पढ़ना न भूल जाएँ।
बिहार के कहलगाँव में राहुल गाँधी द्वारा एक चुनावी रैली का उल्लेख करते हुए, अंसारी ने कहा था कि पूर्व पार्टी प्रमुख लोगों को प्रभावित करने में विफल रहे क्योंकि वे समझ नहीं पाए कि उन्हें क्या बोलना था।
इसमें कोई दो राय नहीं कि कॉन्ग्रेस का ये फैसला न केवल जम्मू-कश्मीर बल्कि पूरे देश में उस पर भारी पड़ेगा और संकट में पड़े कॉन्ग्रेस के राजनीतिक भविष्य के लिए ये ताबूत में आखिरी कील का काम करेगा।